महाराष्ट्र में कुदरत का कहर: मराठवाड़ा में ओलावृष्टि से 19,000 हेक्टेयर फसल बर्बाद, बिजली गिरने से 2 की मौत
Marathwada Rain News: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। 230 गांवों में 19,000 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई, जबकि बिजली गिरने से दो लोगों की जान चली गई।
- Written By: आकाश मसने
फाइल फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Marathwada Crop Damage: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में कुदरत ने एक बार फिर किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पिछले 48 घंटों में हुई बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने पूरे क्षेत्र में तबाही के निशान छोड़े हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक दो लोगों की जान जा चुकी है और हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें मिट्टी में मिल गई हैं।
230 गांवों में मची तबाही
छत्रपति संभाजीनगर स्थित संभागीय आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी प्राथमिक क्षति रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को बीड, लातूर और नांदेड़ जिलों में हुई ओलावृष्टि ने लगभग 19,000 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा की सीधी मार 27,096 किसानों पर पड़ी है, जिनकी मेहनत चंद घंटों में बर्बाद हो गई।
बिजली गिरने से दो की जान गई
बारिश के साथ हुई आकाशीय बिजली ने जानलेवा रूप ले लिया। लातूर के उदगीर में 60 वर्षीय दिगंबर बेलकुंडे और नांदेड़ के हिमायतनगर में विशाखा येल्केवाड़ की बिजली गिरने से मौत हो गई। इसके अलावा, बेजुबान जानवर भी इस आपदा से नहीं बच सके। नांदेड़ और बीड जिलों में चार पशुओं के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
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किस जिले में कितनी बर्बादी?
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक प्रभाव लातूर जिले में देखा गया है।
लातूर: 136 गांव प्रभावित, 15,516 हेक्टेयर फसल को नुकसान।
बीड: 53 गांवों में फसलों को क्षति पहुंची।
नांदेड़: 41 गांवों में ओलावृष्टि और बारिश का कहर।
फसलों के अलावा, बुनियादी ढांचे को भी चोट पहुंची है। रिपोर्ट में बताया गया है कि क्षेत्र में करीब 14 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे कई परिवार बेघर होने की कगार पर हैं।
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प्रभावित किसानों को मिलेगी सहायता राशि
महाराष्ट्र सरकार ने जिला प्रशासन को तत्काल पंचनामा करने और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक हुई इस ओलावृष्टि से रबी की फसलों के साथ-साथ फलों के बागों को भी अपूरणीय क्षति हुई है।
