संभाजीनगर को बड़ी सौगात: 67.80 किमी लंबे नए ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी, 46 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

Sambhajinagar Greenfield Highway: संभाजीनगर में 67.80 किमी लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे-613 को मंजूरी मिल गई है। 46 गांवों की 440 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित होगी, जिससे ट्रैफिक और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
Major boost for Sambhajinagar: Approval granted for a new 67.80 km-long greenfield highway; land from 46 villages to be acquired.
संभाजीनगर ग्रीनफील्ड हाईवे,प्रतीकात्मक तस्वीर(सोर्स: एआई फोटो)
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DMIC Greenfield Highway Project: छत्रपति संभाजीनगर राज्य सरकार ने 25 जून को राजपत्र अधिसूचना जारी कर 67।80 किमी लंबे नए ग्रीनफील्ड (राजमार्ग नं-613) को मंजूरी दी है। यह डीएमआईसी नोड़-1 के तहत करमाड़-बिड़कीन (32 किमी) व बिड़कीन-ढोरेगांव (35।80 किमी) को जोड़ेगा।

संभाजीनगर, गंगापुर व पैठण तहसील के 46 गांवों की लगभग 440 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। यह केवल एक नया सड़क मार्ग नहीं होगा, बल्कि संभाजीनगर की परिवहन व्यवस्था, औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स व भविष्य के शहरी विस्तार की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

वर्तमान में मराठवाड़ा, विदर्भ, जालना व परभणी क्षेत्र से पुणे, सातारा, कोल्हापुर व पश्चिम महाराष्ट्र जाने वाले अधिकांश भारी वाहन संभाजीनगर शहर, बीड़ बाईपास, राष्ट्रीय राजमार्ग-52 व वालूज मार्ग से गुजरते हैं। इससे लगातार यातायात का दबाव बना रहता है, 64 किमी के इस मार्ग पर ट्रैफिक के कारण दो घंटे तक का समय लग जाता है।

ग्रीनफील्ड हाईवे बनने के बाद इन वाहनों को शहर में प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे शहर में भारी वाहनों की आवाजाही कम होगी व ट्रैफिक व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है। पुणे हाईवे तक 68 किमी की दूरी लगभग एक घंटे में पूरी होने की संभावना है।

विकास का बनेगा आधार

विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना संभाजीनगर को देश के प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से निवेश, रोजगार व क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है

संभाजीनगर के लिए आउटर रिंग रोड

यह ग्रीनफील्ड हाईवे संभाजीनगर के लिए एक प्रकार के आउटर रिंग रोड की भूमिका निभाएगा। शेंद्रा, बिडकीन, डीएमआईसी व औरिक से विदर्भ, उत्तर भारत व पूर्वी भारत की ओर जाने वाले वाहन इसका उपयोग कर सकेंगे।

यह क्षेत्र तेजी से औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं, नया हाईवे इनको बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा, जिससे निवेश व औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उद्योगों को पुणे व मुंबई बंदरगाहों तक तेज संपर्क मिलेगा।

कंटेनर परिवहन की लागत कम होगी, समय घटेगा व निर्यात आधारित उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। साथ ही वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क व अन्य सहायक औद्योगिक सुविधाओं के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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