नागपुर आउटर रिंग रोड अपडेट: 107 गांवों की जमीन अधिग्रहण पर फंसा पेंच, मुआवजे को लेकर हिंगना में भारी विरोध

Nagpur Farmers Protest: नागपुर के तीसरे आउटर रिंग रोड प्रकल्प के लिए प्रस्तावित मुआवजे को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि सरकारी दरें बाजार मूल्य से काफी कम हैं।
Nagpur Outer Ring Road Update: Land acquisition for 107 villages hits a snag; Hingna residents express strong resentment over inadequate compensation.
नागपुर तीसरा आउटर रिंग रोड,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Farmers Protest Land Acquisition: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की महत्वाकांक्षी परियोजना 'तीसरा आउटर रिंग रोड' का कार्य प्रगति पर है लेकिन मुआवजे के मुद्दे पर किसानों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। नागपुर के 9 तालुकाओं के 107 गांवों से होकर गुजरने वाली इस सड़क परियोजना के लिए जमीन देने को लेकर किसानों ने सरकार के खिलाफ मोचर्चा खोल दिया है।

किसानों का मुख्य विरोध सरकार द्वारा प्रस्तावित 'अपरिपक्व' मुआवजे की दर है। पारशिवनी जैसे इलाकों में सरकारी दर के अनुसार कृषि भूमि का मूल्य लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये प्रति एकड़ है। नियमों के तहत सरकार इस पर 5 गुना मुआवजा और 25 प्रतिशत सहानुभूति अनुदान दे रही है। हालांकि किसानों का दावा है कि यहां का वास्तविक बाजार मूल्य 35 से 50 लाख रुपये प्रति एकड़ है।

किसानों का कहना है कि 10 से 15 लाख रुपये में जमीन देना प्लॉट के भाव में पूरी खेती बेचने जैसा है। इतनी राशि से कहीं और उतनी ही उपजाऊ जमीन खरीदना असंभव है। हिंगना, वाड़ी और कलमेश्वर जैसे शहरी क्षेत्रों में तो जमीन के भाव करोड़ों में हैं जिससे वहां के किसानों में भारी रोष है।

तीव्र आंदोलन की चेतावनी

नेताओं और किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जबरदस्ती कम दर पर जमीन लेने की कोशिश की तो एक व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। किसानों का स्पष्ट कहना है है कि अनेक पीढ़ियों से हम इन जमीनों पर निर्भर है, इसलिए सरकार को वास्तविकता समझनी होगी। जब तक न्यायोचित मुआवजा नहीं मिलता, कोई भी किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है।

किसानों की प्रमुख मांगें

वास्तविक बाजार मूल्य : सरकार सरकारी दरों के बजाय वर्तमान बाजार भाव के आधार पर न्यायसंगत मुआवजा दे, पुनर्वास और रोजगार केवल आर्थिक मुआवजा ही नहीं बल्कि प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को रोजगार और उनके पुनर्वास की गारंटी दी जाए।

समृद्धि महामार्ग से सीख: किसानों ने समृद्धि महामार्ग के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं है लेकिन 'विकास के नाम पर बर्बादी' बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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