

Imtiaz Jaleel on Sanjay Shirsat: छत्रपति संभाजीनगर में निदा खान की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल के घर में निदा के छिपे होने की खबर सामने आने के बाद पालक मंत्री संजय शिरसाट ने इसे 'बड़े राजनीतिक षड्यंत्र' का हिस्सा बताया था। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में इम्तियाज जलील ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या संजय शिरसाट अब खुद पुलिस जांच अधिकारी (IO) की भूमिका निभा रहे हैं?
इम्तियाज जलील ने न्यायिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक अदालत किसी को दोषी करार नहीं देती, तब तक उसे निर्दोष माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "निदा खान पर आरोप लगे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अपराधी बन गई। कानून के तहत हर व्यक्ति को जमानत के लिए उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार है। सत्र न्यायालय द्वारा जमानत खारिज होने का मतलब यह कतई नहीं है कि उसे तुरंत फांसी पर चढ़ा दिया जाए।"
जलील ने मौजूदा दौर में चल रहे 'मीडिया ट्रायल' पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निदा खान पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप हैं, लेकिन जिस तरह से इसे पेश किया जा रहा है, ऐसा लगता है जैसे उसने कोई बड़ा हत्याकांड किया हो या उसके तार आतंकवादियों से जुड़े हों। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निदा का संबंध आतंकवाद से होता, तो पुलिस ने अब तक उसके खिलाफ 'लुकआउट नोटिस' या 'गैर-जमानती वारंट' क्यों नहीं जारी किया था?
मंत्री संजय शिरसाट द्वारा उन्हें इस मामले का मास्टरमाइंड कहे जाने पर जलील ने कहा कि यह सब आगामी राजनीति को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर शहर में कोई भी घटना होती है, तो उसे सीधे मुझसे जोड़ने की कोशिश की जाती है। अगर पुलिस को मुझसे कुछ पूछना होगा, तो वे पूछेंगे, मैं जांच में सहयोग के लिए तैयार हूं। लेकिन बिना किसी सबूत के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना केवल नफरत की राजनीति को बढ़ावा देना है।"
इम्तियाज जलील ने शिरसाट को उनके पुराने बयानों की याद दिलाते हुए पूछा कि जब उन पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, तब उन्होंने सीबीआई (CBI) जांच की मांग क्यों नहीं की थी? उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं और अगर जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। जलील के इस कड़े रुख के बाद अब यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक रस्साकशी में तब्दील हो गया है।