Sambhaji Nagar: मोबाइल, सोशल मीडिया और फ्लैट संस्कृति पर हंसी-मज़ाक में पेश गंभीर संदेश
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय में हाल ही में केंद्रीय युवा महोत्सव पर नाट्यरंग मंच का आयोजन किया गया था। जिसमें युवाओं के लिए Mobile और Social Media से जुड़ी प्रस्तुति दी गई।
- Written By: अपूर्वा नायक
मोबाइल और सोशल मीडिया का नशा (सौ. सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhaji Nagar News In Hindi: डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय में केंद्रीय युवा महोत्सव के दूसरे दिन ‘नाट्यरंग’ मंच पर प्रस्तुत प्रहसनों ने आधुनिक समाज की विसंगतियों पर जोरदार प्रहार किया।
मोबाइल व सोशल मीडिया के चंगुल में फंसी युवा पीढ़ी, फ्लैट संस्कृति के कारण कमजोर होते रिश्ते व घर-घर बढ़ते तनाव आदि मुद्दों की कलाकारों ने व्यंग्य व हास्य के जरिए सजीव किया। सुबह के सत्र में कुल बारह स्वांग पेश किए गए। बामू की टीम ने ‘चोरी गेलय’ में वोट चोरी के मुद्दे पर टिप्पणी की।
अधिकारों व संविधान की चोरी का सार भी पेश किया गया। बीड़स्थित केएसके कॉलेज ने मोबाइल के कारण टूटते संवाद को कॉमेडी में उजागर किया। विवि के उप-परिसर टीम ने ‘कर्म’ में सेवानिवृत्त लोगों की समस्याएं प्रस्तुत को। तुलसी कंप्यूटर साइंस कॉलेज व मत्स्योदरी महाविद्यालय ने ‘राजनीति का बाजार’ व ‘खेल मांडला’ के जरिए राजनीति में व्याप्त खेल पर करारा प्रहार किया, ‘यमराज की अदालत’ व ‘कैदी’ ने जेल जीवन की सच्चाई दिखलाई।
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वसंतराव नाईक महाविद्यालय का ‘होने दो वायरल’ व मोरेश्वर महाविद्यालय का ‘आज की ताजा खबर’ मोबाइल व सोशल मीडिया की लत के दुष्परिणामों को सामने लाए। दूसरे व तीसरे सत्र में मिमिक्री व मूकाभिनय पेश किए गए, निर्णायक मंडल का में डॉ सतीश सालुके, मंगेश बनसोड़ व सुशीलदत्त बागड़े थे। कुलगुरु डॉ विजय फुलारी समेत अधिकारियों ने प्रस्तुतियों आनंद लिया। मंच संचालन डॉ वैशाली बोधले, डॉ विनोद जाधव, डॉ सुनील टाक, डॉ गजानन दांडगे, डॉ शशिकांत पाटिल, बिरंगणे ने किया।
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सांस्कृतिक विचारों का प्रसार
छात्र विकास बोर्ड के निदेशक डॉ कैलाश अभूरे ने कहा है कि यह युवा महोत्सव छात्र कलाकारों की और से सांस्कृतिक विचारों का बीजारोपण है मराठवाड़ा की मिट्टी से गहरा जुड़ाव दर्शाते हैं। ‘ आज की पीढी को टेक्नोक्रेटिक के रूप में जाना जाता है। युवा महोत्सव में प्रस्तुत एकांकी हास्य व विभिन्न कला रूपी ने बार-बार यह दर्शाया कि वे हमेशा जमीन से जुड़े रहते है, युवा महोत्सव के विकेंद्रीकरण के परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों की भागीदारी दी।
