बालक का हित सर्वोपरि, 11 वर्षीय हुसैन की अभिरक्षा नाना के पास रखने का अदालत का फैसला, पिता की याचिका खारिज
Sambhajinagar Guardianship News: संभाजीनगर की अदालत ने बालक के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए 11 वर्षीय हुसैन की अभिरक्षा नाना के पास रखने का आदेश दिया और जैविक पिता की याचिका खारिज की।
- Written By: रूपम सिंह
जिला न्यायाधीश फैसला(सोर्स: सोशल मीडिया)
Sambhajinagar Child Custody Case: छत्रपति संभाजीनगर बालक के सर्वोत्तम हित, उसके कल्याण और उसकी स्वयं की इच्छा को अभिरक्षा संबंधी मामलों में सबसे महत्वपूर्ण मानते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुधाकर एन. सोनावणे ने 11 वर्षीय शेख हुसैन की अभिरक्षा उसके नाना शेख अनीस शेख युसूफ मनीयार के पास ही बनाए रखने का महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने जैविक पिता शेख नदीम शेख मुसा द्वारा दायर अभिरक्षा याचिका खारिज करते हुए उन्हें महीने में एक बार पुत्र से मिलने की अनुमति प्रदान की है। मामले के अनुसार शेख नदीम का विवाह 19 जून 2014 को नाजमीन से हुआ था। 28 जून 2015 को पुत्र हुसैन का जन्म हुआ।
4 माह होने पर ही मां की हो गई थी मृत्यु
हुसैन के मात्र 4 माह का होने पर 2015 को उसकी मां की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। इसके बाद से बालक का पालन-पोषण और देखभाल उसके नाना तथा परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा की जा रही है। पिता ने वर्ष 2016 में अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि वह बालक के प्राकृतिक अभिभावक है और आर्थिक रूप से सक्षम भी है, इसलिए पुत्र की अभिरक्षा उन्हें सीपी जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्य, गवाहों के बयान, विद्यालय के मुख्याध्यापक की गवाही तथा संबंधित दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया।
सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि नाना बालक की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं की उचित देखभाल कर रहे हैं। अदालत ने स्वयं हुसैन से बातचीत कर उसकी इच्छा भी जानी। इस दौरान बालक ने बताया कि वह अपने नाना को ही अब्बू मानता है और उनके साथ सुरक्षित तथा खुशहाल वातावरण में रह रहा है।
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उसने यह भी कहा कि वह पिता के साथ रहने की इच्छा नहीं रखता। फैसले में अदालत ने कहा कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत एक निश्चित आयु के बाद पिता को अभिरक्षा का अधिकार मिल सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में बालक का कल्याण सर्वोपरि होता है। वर्तमान वातावरण उसके शैक्षिक और मानसिक विकास के लिए अनुकूल है।
