Sambhajinagar Pipeline Welding Issue( Source: Social Media )
Chhatrapati Sambhajinagar Pipeline Welding Issue: छत्रपति संभाजीनगर शहर के भविष्य की जीवनरेखा बताई जा रही महत्वाकांक्षी नई पेयजल योजना को परीक्षण के दौरान ही बड़ा झटका लगा है। कारकीन क्षेत्र में मुख्य पाइपलाइन की वेल्डिंग उखड़ने की गंभीर घटना सामने आई है।
इससे करोड़ों रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। जलापूर्ति शुरू होने से पहले ही सामने आई इस खामी से प्रशासन और ठेकेदार दोनों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल परीक्षण प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है।
इसके चलते कम से कम दो दिन की देरी तय मानी जा रही है। वर्षों से लंबित और उच्च न्यायालय की निगरानी में अंतिम चरण तक पहुंची इस योजना को “अब कुछ ही दिनों में नल में पानी” के दावे के साथ आगे बढ़ाया जा रहा था।
लेकिन वास्तविक परीक्षण में ही मुख्य पाइपलाइन में आई इस खराबी ने पूरे सिस्टम को झटका दिया है। नई योजना के पहले चरण में 200 एमएलडी पानी आपूर्ति के लिए जैकवेल से मुख्य पाइपलाइन में पानी छोड़कर परीक्षण शुरू किया गया था।
23 मार्च की रात पंप चालू कर प्रारंभ में लगभग 900 मीटर तक पानी पहुंचाया गया। इसके बाद अगले दिन करीब साढ़े तीन किलोमीटर तक परीक्षण सफल रहा। तीसरे दिन पाइपलाइन से पानी दस किलोमीटर तक पहुंच गया और बीच-बीच में मिली छोटी लीकेज को ठीक किया गया।
चौथे दिन जब पाइपलाइन करीब 13.80 किलोमीटर दूरी तय कर कारकीन क्षेत्र तक पहुंची, तभी मुख्य पाइपलाइन की वेल्डिंग में खराबी सामने आई। पाइपलाइन में पानी भरा होने के कारण तत्काल मरम्मत संभव नहीं थी।
इसके लिए पूरी लाइन खाली करनी पड़ी और उसके बाद ही दुरुस्ती कार्य शुरू किया गया, करीब 2740 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही यह महत्वाकांक्षी जल योजना महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के माध्यम से जीवीपीआर कंपनी द्वारा क्रियान्वित की जा रही है।
परियोजना अपने अंतिम चरण में है। ऐसे में इस तरह की तकनीकी खामी सामने आने से पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर गभीर सवाल खड़े हो गए है। यह योजना अगले 50 वर्षों के लिए शहर की जल आवश्यकताओं को पूरा करने वाली मानी जा रही है इसलिए शुरुआती चरण में ही इस तरह की गड़बड़ी चिंताजनक है।
योजना के तहत जैकवेल का निर्माण पूरा हो चुका है। यहां 3700 अश्वशक्ति के दो उच्च क्षमता वाले पंप लगाए गए हैं। गुड़ी पाड्या के अवसर पर जायकवाडी बाथ से सायफन पद्धति के जरिए जैकवेल में पानी लिया गया दो दिनों तक पानी संग्रहित कर उसकी जांच की गई और फिर उसे मुख्य पाइपलाइन में छोड़ा गया।
इसी दौरान तकनीकी समस्या सामने आ गई। मुख्खा पाइपलाइन की पारंपरिक हाइड्रॉलिक परीक्षण पद्धति के बजाय अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग किया गया।
कारकीन तक पानी पहुंचने के बाद आगे का परीक्षण पूरी तरह रोक दिया गया है। मरम्मत पूरी होने तक पाइपलाइन में दोबारा पानी नहीं छोड़ा जा सकता। इससे कम से कम दो दिन तक परीक्षण ठप रहने की स्थिति है।
हालांकि रविवार दोपहर तक मरम्मत पूरी करने का प्रयास जारी है, लेकिन इसके बाद फिर से पूर्ण परीक्षण करना होगा। इससे पूरी समयसारणी और आगे खिसकने की संभावना है।
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गुड़ी पाड़वा के मौके पर योजना शुरू करने की जल्दबाजी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। उद्घाटन की समयसीमा और दबाव के कारण तकनीकी जांच में कुछ पहलुओं की अनदेखी हुई क्या, यह सवाल उठाया जा रहा है।