
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar politics: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजित पवार गुट ने जिस ‘किंगमेकर’ भूमिका का सपना देखा था, वह मतगणना के साथ ही चकनाचूर हो गया। प्रत्येक प्रभाग में उम्मीदवार उतारने, आक्रामक संगठन विस्तार और सत्ता संतुलन तय करने की रणनीति के बावजूद गुट न तो एक सीट हासिल कर सका और न ही किसी भी राजनीतिक धड़े को अपनी ओर झुकाने लायक स्थिति बना पाया।
चुनाव पूर्व आकलन था कि अजित पवार गुट 8 से 10 सीटें जीतकर मनपा में सत्ता गठन की चाबी अपने हाथ में रख सकता है। लेकिन नतीजों ने साफ कर दिया कि केवल उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने से राजनीतिक ताकत नहीं बनती। मतदाताओं के बीच न तो पार्टी की स्पष्ट पहचान बनी और न ही नेतृत्व को लेकर भरोसा पैदा हो सका।
शहरी राजनीति में यह चुनाव स्पष्ट रूप से ध्रुवीकृत रहा। भाजपा और एमआईएम ने अपने-अपने कोर वोट बैंक को मजबूती से साधा। इस दो ध्रुवीय मुकाबले में अजित पवार गुट हाशिये पर चला गया। कई वार्डों में। उसके उम्मीदवार तीसरे या चौथे स्थान पर सिमट गए, जिससे यह संदेश गया कि गुट का शहरी आधार कमजोर हो चुका है।
सबसे अहम बात यह रही कि चुनाव परिणामों के बाद अजित पवार गुट सत्ता गठन के किसी भी गणित का हिस्सा नहीं बन सका, न समर्थन की मांग, न समर्थन की क्षमता दोनों मोर्चों पर गुट खुद को अग्रासंगिक साबित करता नजर आया।
मनपा चुनाव के परिणम के बाद यह साफ हो चुका है कि यह चुनाव अजित पवार गुट के लिए चेतावनी नहीं, बल्कि राजनीतिक हकीकत का आईना है। बिना स्पष्ट पहचान, मजबूत शहरी एजेंडा और भरोसेमंद नेतृत्व के ‘किंगमेकर’ बनने की कोशिश केवल भ्रम ही साबित होती है,
चुनावी दौर में कॉर्नर सभाएं, बैठकें और नेताओं की मौजूदगी जरूर दिखी, लेकिन अभियान में कोई केंद्रीय नैरेटिव नहीं था। स्थानीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख और मनपा को लेकर ठोस विजन का अभाव लगातार खलता रहा।
परिणामस्वरूप मतदाता यह तय नहीं कर पाए कि गुट को समर्थन देने से उन्हें क्या हासिल होगा, वैसे, चुनाव से पूर्व इस पार्टी के विधायक सतीश चव्हाण जिन्होंने मनपा चुनाव की कमान संभाली थी, उनका दावा था कि इस बार शहर की जनता अजित पवार गुट को निर्णायक मोड में सीटें देगी।
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उन्होंन भाजपा व शिवसेना पर नाम लिए बिना आरोप लगाया था कि मनपा पर 25 सालों से सत्ता संभाले दलों ने शहर को विकास से दूर रखकर लूट खसोट की 2015 में संयुक्त राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने चार सीटें जीतकर मनपा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
इस बार अजित पवार गुट संख्या बढ़ाने के इरादे से मैदान में उत्तरा था, लेकिन नतीजे उम्मीदों के उलट रहे। यह गिरावट बताती है कि शहरी मतदाता अब पुराने समीकरणों से आगे बढ़ चुका है।






