सपना रह गया अधूरा: दिल्ली जा रहे छत्रपति संभाजीनगर के 4 मोबाइल व्यापारियों की सड़क हादसे में गई जान, 2 गंभीर
Mobile Traders Accident: दिल्ली मशीनें खरीदने जा रहे संभाजीनगर के 4 मोबाइल व्यापारियों की मप्र में एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में मौत हो गई और 2 घायल हैं। शहर के व्यापार जगत में शोक की लहर है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा (सोर्सः नवभारत)
Mobile Traders Accident At Mandsaur Highway: मोबाइल कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का सपना लेकर बुधवार रात छह युवक दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। परिवार से जल्द लौटने का वादा किया था और नई मशीनों के साथ कारोबार विस्तार की योजनाएं बन रही थीं। लेकिन कुछ ही घंटों बाद मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे ने चार परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।
तेज रफ्तार कार ट्रक से टकरा गई, जिससे चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की खबर संभाजीनगर पहुंचते ही व्यापार जगत और मृतकों के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई।
मृतकों की पहचान राजेंद्र भावराव कवडे (46), संदीप नवनाथ बोरसे (35), सचिन गंगाधर गजभारे (37) और रविंद्र भागवत काले (28) के रूप में हुई है। वहीं अब्दुल खलील अब्दुल समद (30) और उमर इस्माईल जागीरदार (32) गंभीर रूप से घायल हैं।
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कारोबार को नई दिशा देने निकले थे
राजेंद्र कवडे शहर के कैनॉट क्षेत्र में ‘फोन प्लैनेट’ नाम से आधुनिक मोबाइल मरम्मत केंद्र संचालित करते थे। ग्राहकों को अत्याधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वे दिल्ली के सदर बाजार से नई मशीनें खरीदने जा रहे थे। बुधवार रात करीब 11 बजे सभी साथी कार से रवाना हुए। गुरुवार सुबह मंदसौर के निकट उनकी कार एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि चार लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
सुबह आई खबर ने शहर को स्तब्ध कर दिया
गुरुवार सुबह जैसे ही हादसे की सूचना शहर पहुंची, मोबाइल व्यापारियों और परिचितों के बीच शोक की लहर फैल गई। शुरुआत में कई लोगों को इस खबर पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन कुछ ही देर में हादसे की पुष्टि होने पर मृतकों के घरों में मातम छा गया। बड़ी संख्या में परिचित और रिश्तेदार पीड़ित परिवारों के घर पहुंचने लगे।
अधूरे रह गए सपने, बिखर गए परिवार
राजेंद्र कवडे ने कुछ समय पहले ही अपना नया प्रतिष्ठान शुरू किया था। आधुनिक तकनीक से कारोबार को आगे बढ़ाने का उनका सपना अब अधूरा रह गया। वहीं रविंद्र काले परिवार के इकलौते पुत्र थे। उनके पीछे साढ़े तीन वर्ष का बेटा और गर्भवती पत्नी हैं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। उनकी असामयिक मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
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एक निर्णय ने बचा ली जान
मृतकों के परिचित और मोबाइल व्यवसायी अमोल पाटील को भी इस यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, लेकिन अन्य कार्यों में व्यस्त होने के कारण उन्होंने जाने से इनकार कर दिया। हादसे की खबर के बाद उन्हें लगातार फोन आते रहे और लोग यह पूछते रहे कि क्या वे भी उसी वाहन में थे।
कुछ घंटे पहले हुई बातचीत अब उनके लिए जीवन भर की याद बन गई है। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल चार परिवारों का सहारा छीन लिया, बल्कि शहर के मोबाइल व्यापार जगत को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट
