SIT probe Maharashtra land complaints ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Land Dispute Investigation: छत्रपति संभाजीनगर जिले में जमीन से संबंधित विभिन्न प्रकार की शिकायतों की गहन और निष्पक्ष जांच के लिए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम-एसआईटी) गठित करने का निर्णय लिया है।
यह दल छत्रपति संभाजीनगर के संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में कार्य करेगा और नागरिकों से जमीन से संबंधित गंभीर शिकायतें आमंत्रित की जाएगी। संभागीय आयुक्त जितेंद्र पापलकर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी शिकायतें विभागीय आयुक्त, छत्रपति संभाजीनगर के नाम से 10 अप्रैल 2026 तक विभागीय आयुक्त कार्यालय में प्रस्तुत करें।
बताया गया है कि वर्ष 2026 के बजट सत्र के दौरान महाराष्ट्र विधानमंडल छत्रपति संभाजीनगर शहर के ब्रिजवाड़ी क्षेत्र स्थित गट क्रमांक 30 की जमीन से जुड़े कथित अनियमित लेन-देन का मुद्दा विधान परिषद में उठाया गया था। इस पर राजस्व मंत्री ने जिले में जमीन से संबंधित विभिन्न शिकायतों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने का आश्वासन दिया था।
आश्वासन को पूरा करते हुए राजस्व एवं वन विभाग ने शासनादेश जारी कर इस विशेष जांच दल का गठन किया है। इस विशेष जांच दल में विभागीय आयुक्त को अध्यक्ष बनाया गया है।
इसके अलावा पुलिस महानिरीक्षक, छत्रपति संभाजीनगर परिक्षेत्र या उनके प्रतिनिधि, जिला कलेक्टर छत्रपति संभाजीनगर, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एसपी, पंजीयन विभाग के उप महानिरीक्षक छत्रपति संभाजीनगर तथा भूमि अभिलेख विभाग के उपनिदेशक को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
शिकायत के स्वरूप के अनुसार संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों या विशेषज्ञों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने की व्यवस्था को लेकर विशेष सुविधाएं प्रदान की गई है।
यह भी पढ़ें:-चुनाव से पहले हंगामा, छत्रपति संभाजीनगर पंचायत समिति पर महायुति का कब्जा; बालासाहेब गाहे बने उपसभापति
जिले के नागरिकों को जमीन से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। नागरिक अपनी शिकायतें 10 अप्रैल 2026 तक विभागीय आयुक्त कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते है विशेष जांच दल प्राप्त शिकायतों की विस्तृत जांच करेगा और आवश्यक मामलों में आगे की कार्रवाई वके लिए सरकार की सिफारिश करेगा, साथ ही जांच की पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सीधी जाएगी, सरकार का मानना है कि इस पहल से जिले में जमीन से जुड़े लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनियमितताओं पर रोक लगेगी और नागरिकों की शिकायतों को न्याय मिल सकेगा।