संभाजीनगर में Haj House के मूल उद्देश्य पर मंडरा रहा संकट, कर्मचारी कमी और प्रशासनिक अव्यवस्था से बढ़ी चिंताएं
Sambhajinagar Haj House में वक्फ बोर्ड कार्यालय स्थानांतरित करने के प्रस्ताव, कर्मचारियों की कमी और अव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी। सामाजिक संगठनों ने जांच व सुधार की मांग की है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
हज हाउस (सोर्सः AI)
Chhatrapati Sambhajinagar Haj House Mismanagement: छत्रपति संभाजीनगर स्थित हज हाउस को लेकर राज्यभर में चिंता बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यालय को हज हाउस परिसर में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के बाद हज यात्रियों, प्रशिक्षकों, सामाजिक संगठनों और मुस्लिम समाज के विभिन्न वर्गों ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि हज हाउस का निर्माण हज यात्रियों की सुविधाओं और सेवाओं को ध्यान में रखकर किया गया था, इसलिए इसके मूल उद्देश्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
हज यात्रियों की सुविधाओं पर पड़ सकता है असर
हज हाउस महाराष्ट्र के हजारों यात्रियों के लिए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहायता का प्रमुख केंद्र माना जाता है। आगामी हज-2027 की तैयारियों के बीच यदि वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यालय यहां स्थानांतरित किया जाता है, तो स्थान की कमी और संसाधनों के बंटवारे के कारण यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
सम्बंधित ख़बरें
ठाणे में ढोल-लेजिम की थाप और फूलों की बारिश के बीच जिला परिषद स्कूल दिवे-अंजूर में प्रवेशोत्सव की धूम
बदलते दौर में भी अडिग: ठाणे का ऐतिहासिक हिंदी स्कूल, जहाँ प्रवेशोत्सव पर बंटीं मुफ्त किताबें
ठाणे के म्युनिसिपल स्कूल के विद्यार्थी से डिप्टी CM तक! एकनाथ शिंदे ने अपनी कहानी से बच्चों को किया मोटिवेट
दूसरों के बच्चे चुराने के बजाय अपने बच्चों को बड़ा करे भाजपा, शर्मिला ठाकरे का मोदी सरकार पर बड़ा हमला
कर्मचारियों की कमी से बढ़ रही परेशानियां
हज समिति में कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण कामकाज प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। दस्तावेजों की जांच, आवेदन प्रक्रिया, प्रशिक्षण और अन्य सेवाओं में देरी होने से यात्रियों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
आर्थिक प्रबंधन पर भी उठे सवाल
हज हाउस के बिजली बिल और संपत्ति कर का समय पर भुगतान नहीं होने से सरकार को जुर्माना और ब्याज के रूप में अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है। इसके अलावा बिजली भार कम करने की प्रक्रिया में देरी के कारण हर महीने लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च होने की बात भी सामने आई है।
बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर नाराजगी
हज हाउस की लिफ्ट लंबे समय से बंद होने के कारण बुजुर्ग यात्रियों को दूसरी मंजिल तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। सभागार में लगी वातानुकूलन व्यवस्था के बार-बार खराब होने से विभिन्न कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। अग्निशमन उपकरणों की समय सीमा समाप्त होने तथा भवन के रखरखाव और साफ-सफाई को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी शिकायतें
हज यात्रियों के टीकाकरण और चिकित्सकीय जांच के लिए दूर स्थित सरकारी अस्पतालों में भेजे जाने से महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कई लोगों का कहना है कि अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक तरीके से संचालित की जा रही है।
निरीक्षक नियुक्ति और डिजिटल व्यवस्था पर सवाल
हज निरीक्षकों की नियुक्ति और जिलों के आवंटन को लेकर भी असंतोष सामने आया है। कुछ निरीक्षकों को उनके निवास स्थान से 300 से 400 किलोमीटर दूर क्षेत्रों की जिम्मेदारी दिए जाने से अतिरिक्त खर्च और समय की बर्बादी हो रही है। वहीं, हज समिति की वेबसाइट लंबे समय से अपडेट नहीं होने के कारण यात्रियों को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
यह भी पढ़ेः- ठाणे के म्युनिसिपल स्कूल के विद्यार्थी से डिप्टी CM तक! एकनाथ शिंदे ने अपनी कहानी से बच्चों को किया मोटिवेट
स्वतंत्र जांच और सुधार की उठी मांग
हज क्षेत्र से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशिक्षकों और विभिन्न संगठनों ने हज समिति के प्रशासनिक कामकाज की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। साथ ही रिक्त पदों को शीघ्र भरने, पूर्णकालिक कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति करने, हज हाउस की व्यवस्थाओं में सुधार लाने और भवन को केवल हज संबंधी गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखने की मांग भी की जा रही है।
विभिन्न मुस्लिम संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से भी इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की गई है। समाज के विभिन्न वर्गों का मानना है कि हज हाउस का मूल उद्देश्य सुरक्षित रखते हुए प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट
