कभी पिछड़ा इलाका… अब इंडस्ट्रियल हब! नामी कंपनियों ने संभाजीनगर को बनाया नया निवेश केंद्र
एक समय था जब छत्रपति संभाजी नगर की पहचान पिछड़े इलाके के तौर पर होती थी, लेकिन अब इसकी तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। साल 2019 में ही पीएम नरेंद्र मोदी ने ऑरिक इंडस्ट्रियल एस्टेट की नींव रखी थी।
- Written By: अपूर्वा नायक
ऑरिक इंडस्ट्रियल सिटी (सौ. सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhaji Nagar News In Hindi: कभी शहर को पिछड़ेपन और उद्योगों की कमी के लिए पहचाना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। 7 सितंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑरिक औद्योगिक एस्टेट की नींव रखी थी। महज छह साल में यह परियोजना छत्रपति संभाजीनगर की औद्योगिक पहचान बन गई है। आज देशी-विदेशी कंपनियों के निवेश से यह इलाका एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में उभर रहा है।
स्थानीय संगठनों और प्रतिनिधियों की पहल शहर में बजाज और वीडियोकॉन जैसी कंपनियों ने कभी औद्योगिक मानक गढ़े थे, लेकिन उसके बाद उद्योगों की रफ्तार थम गई थी। इसे देखते हुए सीएमआईए और एमएएसआईए जैसे संगठनों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मिलकर 10 हजार एकड़ क्षेत्र में एक विशाल औद्योगिक एस्टेट का खाका खींचा।
शुरुआत में निवेशकों की संख्या कम रही, लेकिन पानी, बिजली, सड़क, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के बाद स्थिति बदली। आज ऑरिक शेंद्रा और बिडकीन दोनों फेज में सभी प्लॉट बिक चुके हैं। एथर, टोयोटा किर्लोस्कर, पीरामल फार्मा और उंडो मिनो जैसी नामी कंपनियों ने यहां उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे न केवल निवेश बढ़ा है, बल्कि छत्रपति संभाजीनगर को औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत पहचान भी मिली है।
सम्बंधित ख़बरें
Purple Foods For Daily Diet: आपकी प्लेट में क्यों होनी चाहिए बैंगनी रंग की जगह? जानें 10 सबसे पौष्टिक फूड्स
Navabharat Nishanebaaz: मंत्री पर आई नई जिम्मेदारी, बना एक और विभाग का प्रभारी
Jaya Parvati Vrat: जया पार्वती व्रत इस कथा के बिना है अधूरा, ज़रूर करें पाठ, मनोकामनाएं होंगी पूरी
CRPF Foundation Day: सिर्फ आंतरिक सुरक्षा नहीं, युद्ध से आपदा तक हर मोर्चे पर देश की ढाल है CRPF, जानिए इतिहास
ये भी पढ़ें :- अंबिकानगर से इंदौर तक फैला चरस नेटवर्क, पुलिस ने बताया कैसे चलता था यह नशे का धंधा
पानी के संकट को सुलझाने का प्रयास
शहर में पानी की किल्लत सबसे बड़ी चुनौती थी। जायकवाड़ी बांध भरा होने के बावजूद लोगों को आठ-दस दिन तक जल आपूर्ति नहीं मिलती थी। नई जलापूर्ति योजना ने इस समस्या को काफी हद तक सुलझा दिया है। वहीं, समृद्धि हाईवे और धुले-सोलापुर हाईवे ने परिवहन को आसान बनाया, एयर कनेक्टिविटी को भी लगातार बेहतर करने की कोशिश जारी है। इन सबने निवेशकों को आकर्षित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। अब जब सभी प्लॉट बिक चुके है और नए क्षेत्र विकसित किए जा रहे है, तो उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास से शहर का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा, स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध होंगे।
