संभाजीनगर में छात्राओं की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र को अंतिम मौका; 20 फरवरी तक जवाब
Bombay High Court: छत्रपति संभाजीनगर के स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने केंद्र सरकार को 20 फरवरी 2026 तक हलफनामा दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Aurangabad Bench Girls Safety: छत्रपति संभाजीनगर राज्य के स्कूलों में पढ़ने वाली 18 वर्ष से कम आयु की छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय और कनिष्ठ महाविद्यालय में विशाखा समिति जैसी शिकायत निवारण समिति गठित किए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने केंद्र सरकार की अंतिम अवसर दिया है।
न्यायालय ने निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार 20 फरवरी 2026 तक अपना हलफनामा दाखिल करें यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति विभा कंकणवाडी और हितेन एस. वेणगावकर की खंडपीठ ने पारित किया।
याचिका में यह उल्लेख किया गया है कि महाराष्ट्र शासन के स्कूल शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग ने 10 मार्च 2022 को इस विषय में शासन निर्णय जारी किया था इसके बावजूद अल्पवयीन छात्राओं के संरक्षण के लिए आवश्यक वैधानिक सुरक्षा तंत्र और संस्थागत उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है।
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छात्राओं के लिए अलग व्यवस्था का अभाव
याचिका में कहा गया है कि सरकारी और अन्य कार्यालयों में कार्यरत महिलाओं के लिए विशाखा समिति के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था है। लेकिन 18 वर्ष से कम आयु की छात्राओं के लिए ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था मौजूद नहीं है स्कूलों में विभिन्न माध्यमों से अल्पवयीन छात्राओं का शोषण होने की घटनाएं सामने आती रहती है।
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जानकारी के अभाव और शिकायत दर्ज कराने के लिए उचित मंच न होने के कारण छात्राओं को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है इसी पृष्ठभूमि में प्रत्येक स्कूल और कनिष्ठ महाविद्यालय में शिकायत निवारण समिति गठित करने की मांग की गई है यह याचिका अधिवक्ता अक्षरा शरद मडके ने पार्टी-इन-पसैन के रूप में दायर की है, जिसमें छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ठोस और प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील वी. एम. कागणे ने न्यायालय को बताया कि राज्य का हलफनामा तैयार है और शीघ्र दाखिल किया जाएगा वहीं केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता कृष्णा सोलंके ने दलील दी कि पूर्व में नियुक्त वकील अब मामला नहीं देख रहे है, इसलिए निर्देश प्राप्त करने में समय लग रहा है।
