छत्रपति संभाजीनगर जलापूर्ति योजना पर हाईकोर्ट सख्त; संयुक्त निरीक्षण के आदेश, जानें क्या है पूरा मामला?

Water Supply Scheme News: छत्रपति संभाजीनगर की जलापूर्ति योजना पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मनपा और ठेकेदार के दावों की सच्चाई जानने के लिए संयुक्त निरीक्षण करने का आदेश दिया है।
The Bombay High Court has ordered a joint inspection of Chhatrapati Sambhajinagar’s water supply project following conflicting claims between the AMC and the contractor.
बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो- सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar High Court News: छत्रपति संभाजीनगर शहर की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ ने अब तक हुए कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को पुनः संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

कोर्ट ने निरीक्षण का दिया आदेश

सुनवाई के दौरान महापालिका और ठेकेदार कंपनी के बीच अधूरे कामों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। महापालिका की ओर से अधिवक्ता संभाजी टोपे ने दावा किया कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य अभी अधूरा है और क्लोरीनेशन कक्ष भी पूरी तरह तैयार नहीं है। इसके विपरीत ठेकेदार जीवीपीआर कंपनी की ओर से अधिवक्ता आर. एन. धोर्डे ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि प्लांट और क्लोरीनेशन कक्ष दोनों तैयार है।

हालांकि, महापालिका ने स्पष्ट किया कि आवश्यक लाइसेंस के बिना प्रक्रिया पूर्ण नहीं मानी जा सकती। परियोजना के अंतर्गत शहर में 1940 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जानी है, जिसमें अब तक लगभग 1300 किलोमीटर कार्य ही पूरा हुआ है। महापालिका के अनुसार यह पाइपलाइन भी कई स्थानों पर असंगत है, जिससे इसका उपयोग फिलहाल संभव नहीं है।

पेयजल की 16 टंकियां तैयार होने का किया गया था दावा

वहीं ठेकेदार पक्ष ने कार्य शीघ्र पूर्ण होने का दावा किया और बताया कि 16 जल टंकियां तैयार हो चुकी है, जिन्हें मार्च अंत तक छत्रपति संभाजीनगर महापालिका को सौंप दिया जाएगा। यह योजना 50 लाख की संभावित जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाई गई है। वर्तमान में शहर की आबादी करीब 18 लाख है, जो 2052 तक 33 लाख से अधिक होने का अनुमान है।

परियोजना के तहत चरणबद्ध तरीके से पानी आपूर्ति शुरू की जाएगी, जिसमें अंतिम चरण में 600 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। सुनवाई में विभिन्न पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की, जबकि न्यायालय ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त निरीक्षण को आवश्यक बताया।

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