संभाजीनगर: बायोमाइनिंग कार्य में 400 करोड़ के घोटाले का आरोप; विरोधी पक्षनेता ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
Sambhajinagar Biomining Scam: छत्रपति संभाजीनगर के विरोधी पक्षनेता अब्दुल समीर साजिद ने कचरा बायोमाइनिंग व अवैध डंपिंग में 400 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
- Written By: रूपम सिंह
अब्दुल समीर साजिद, कचरा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Solid Waste Management: छत्रपति संभाजीनगर शहर के पडेगांव, गांधेली शिवार तथा धुले महामार्ग परिसर में पुराने कचरे के बायोमाइनिंग कार्य और अवैध कचरा डंपिंग को लेकर महानगरपालिका के विरोधी पक्षनेता अब्दुल समीर साजिद ने आयोजित प्रेस वार्ता में गंभीर आरोप लगाए हैं। बीते 5 साल में कचरा प्रक्रिया पर 400 करोड़ रुपए खर्च करने का दावा करते हुए मनपा प्रशासन के कामकाज पर कई सवाल उपस्थित किए है।
उन्होंने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर विकास विभाग तथा मनपा प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। प्रेस वार्ता में एमआईएम के नगरसेवक ओसामा अब्दुल कदीर प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
अब्दुल समीर ने बताया कि पुराने कचरे पर बायोमाइनिंग प्रक्रिया करने का काम जीएनआई कंपनी को दिया गया था, लेकिन कंपनी ने ठेके की शतों और नियमों का पालन नहीं किया। आज सभी नारेगांव में कई टन कचरे के ढेर जस की तस है। इसके बावजूद जीएनआई कंपनी को अब तक करीब 39 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने भी कंपनी के
कामकाज पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की थीं।
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मंडल ने आवश्यक अनुमति और घनकचरा व्यवस्थापन नियम 2016 के तहत प्राधिकरण पत्र प्राप्त नहीं करने के कारण मैसर्स स्ट्रक्चर कंपनी का बायोमाइनिंग कार्य तत्काल बंद करने के आदेश जारी किए थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पत्र क्रमांक 1309/2025 दि.16 जुलाई 2025 के अनुसार संबंधित कंपनी का बायोमाइनिंग कार्य नियमों के विरुद्ध पाया गया था। इसके बावजूद कार्य जारी रखा गया। वहीं मंडल के एक अन्य पत्र क्रमांक 1253/2025 दि।04 जुलाई 2025 में कच्ची घाटी शिवार गट नंबर 36, सुलतानपुर गट नंबर 93 और 98 तथा पडीत खेत जमीन और मांडकी गट नंबर 84 के समीप में अवैध रूप से कचरा डंप किए जाने का उल्लेख किया गया है।
पुराने कचरा डंपिंग मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
विरोधी पक्ष नेता ने आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार कंपनियों द्वारा सुखना नदी, कच्ची घाटी, सुलतान पुर शिवार तथा आसपास के खेत क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कचरा फेंका जा रहा है। इससे पानी, हवा और जमीन प्रदूषित हो रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 21 मार्च 2025 को जीएनआई कंपनी द्वारा जारी अवैध बायोमाइनिंग कार्य बंद करने के आदेश दिए थे, लेकिन उसके बाद भी नियमों का उल्लंघन जारी है।
विशेषकर, जीएनआई कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने को लेकर महाराष्ट्र प्रदूषण बोर्ड ने एमआईडीसी सिडको पुलिस से पत्र व्यवहार भी किया था। परंतु, आज तक उस पत्र पर पुलिस प्रशासन ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने को लेकर कोई पहल नहीं की है। उन्होंने बताया कि पडेगांव क्षेत्र के कचरा डंपिंग यार्ड में पिछले 15 दिनों से आग लगी हुई है और अब तक आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी है। इस कचरे पर प्रक्रिया करने का काम मायोवेसेल कंपनी को दिया गया है।
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2018 में भी नागरिकों ने किया था विरोध
अब्दुल समीर साजिद ने आशंका व्यक्त की कि मामले को दबाने के लिए जानबूझकर कचरे में आग लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि लगातार उठ रहे धुएं से आसपास के नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में भी स्थानीय किसानों और नागरिकों ने कचरा डंपिंग के विरोध में बड़ा आंदोलन किया था, जिसके बाद प्रशासन ने छह महीने में कचरा हटाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक समस्या कायम है। विरोधी पक्षनेता अब्दुल समीर साजिद ने मांग की है कि संबंधित ठेकेदार कंपनियों, जिम्मेदार अधिकारियों तथा प्रदूषण नियंत्रण मंडल के संबंधित कर्मचारियों की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
