Sambhajinagar Startup Inspiration( Source: Social Media )
Sambhajinagar Startup Inspiration: छत्रपति संभाजीनगर औरंगाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘रेवर शेयर’ व्याख्यानमाला का 83वां सत्र एमआईटी परिसर स्थित आनंद हॉल में उत्साहपूर्ण व प्रेरणादायी माहौल में हुआ। इसमें एसएस टेक्नोलॉजी की सह-संस्थापक व प्रख्यात उद्यमी निधि पंत मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थीं।
कार्यक्रम में छात्र, स्टार्टअप संस्थापक, पेशेवर व उद्योग जगत से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए, निधि ने बताया कि केमिकल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि से ग्रामीण भारत के फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में कदम रखना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने शुरुआती असफलताओं, संसाधनों की कमी व बाजार की चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ने का अपना अनुभव साझा किया।
उन्होंने कहा, ‘स्टार्टअप सिर्फ एक आइडिया नहीं होता, बल्कि समस्या को गहराई से समझकर उस पर लगातार काम करने की क्षमता ही असली सफलता है। ‘250 करोड़ की फंडिंग जुटाने के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि निवेशकों को प्रभावित करने के लिए केवल प्रेजेंटेशन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दीर्घकालीन प्रभाव, भरोसेमंद मॉडल व मजबूत कार्यान्वयन क्षमता दिखाना जरूरी है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, वर्ल्ड बैंक व गेट्स फाउंडेशन जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्केलेबल व सस्टेनेबल मॉडल ही उनकी सफलता का आधार रहा है।
ग्रामीण भारत की महिलाओं को उत्पादन श्रृंखला में जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण करना उनके कार्य का मुख्य उद्देश्य है। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों व उद्यमियों ने फंडिंग, स्केलिंग, टीम बिल्डिंग व नेतृत्व से जुड़े सवाल पूछे, जिनका निधि ने स्पष्ट व्यावहारिक जवाब दिया। अंत में निधि का सम्मान किया गया। आशिष गर्दै, सुनील रायधत्ता, वेद जहागीरदार, सचिन काटे व योगिता नाहर सहित अन्य मौजूद थे।
हाल के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 80% महिलाएं कृषि गतिविधियों में लगी हुई हैं, फिर भी उनके पास अक्सर स्वामित्व के अधिकार नहीं होते हैं और उन्हें वेतन असमानताओं का सामना करना पड़ता है।
शिक्षा में असमानता बनी हुई है, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का एक बड़ा प्रतिशत सीमित शिक्षा प्राप्त कर रहा है। सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में बदलाव के लिए इन मुद्दों का समाधान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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यह समझना आवश्यक है कि ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण केवल लैंगिक समानता का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक प्रगति में एक निवेश है। जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो समुदाय समृद्ध होते हैं। ग्रामीण महिलाओं की शिक्षा और कौशल विकास से उनकी आजीविका में सुधार होता है।