नागपुर जिला परिषद का ₹137 करोड़ 'लापता'! सरकार की बेरुखी से ग्रामीण विकास के पहिये थमे, बैकलाग 212 करोड़ पार

Nagpur Zilla Parishad Budget: नागपुर जिला परिषद का ₹137 करोड़ का मुद्रांक शुल्क बकाया! सरकार से नहीं मिल रहा पूरा हक, ग्रामीण विकास की योजनाओं पर ब्रेक। पढ़ें बजट और बकाया का पूरा गणित।
Nagpur Zilla Parishad faces a massive ₹137 crore backlog in stamp duty funds from the state government. Impact on rural development and ZP budget 2026.
नागपुर जिला परिषद (फाइल फोटो)
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Stamp Duty Backlog Nagpur ZP: ग्रामीण विकास के लिए मिनी मंत्रालय समझे जाने वाले जिला परिषदों को कभी उनके हिस्से का मुद्रांक शुल्क पूरा नहीं मिला। इसमें नागपुर जेडपी का भी समावेश है। राज्य में सरकार किसी की भी रही हो लेकिन जेडपी को बीते 7-8 वर्षों में कभी मुद्रांक शुल्क अनुदान का पूरा हिस्सा नहीं दिया गया जिसके चलते बैकलाग 212 करोड़ रुपयों का हो गया था। इस वर्ष भी सरकार ने 90 करोड़ रुपये देने को मंजूरी दी है।

इसमें से फरवरी महीने तक 41 करोड़ व 34 करोड़ रुपये की दो किश्तों में 75 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। अभी भी 137 करोड़ रुपये सरकार की ओर बकाया है। इस वर्ष भी जेडपी का बजट पेश करने के पूर्व मुद्रांक शुल्क की मांग के लिए जिप सीईओ विनायक महामुनि ने भी ग्राम विकास विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखा था, जिसके चलते बीते वर्ष की तुलना में इस बार अधिक रकम मिली। पिछले वर्ष 22.45 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।

बजट का आधार

हर वित्तीय वर्ष में 27 मार्च के पूर्व तक जिला परिषद का सेसफंड बजट बनाया जाता है जिसका आधार मुद्रांक शुल्क ही होता है। हर वर्ष पंजीयन महानिरीक्षक पुणे को जिला परिषद को कितना मुद्रांक शुल्क देय है, इसकी जानकारी दी जाती है। मांग के अनुसार ही बजट तैयार किया जाता है लेकिन देय मांग के अनुसार संपूर्ण रकम प्राप्त ही नहीं होती।

यही कारण है कि अब भी 137 करोड़ रुपये अप्राप्त है। अगर संपूर्ण अनुदान प्राप्त हो तो जिले के विकास कार्य व व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं की गति अधिक तेज होगी। बीते वर्ष 22.45 करोड़ शुल्क प्राप्त हुए थे। जेडपी के अन्य आय के स्रोत को मिलाकर कुल बजट 46.60 करोड़ का बनाया गया था।

इस वर्ष सरकार ने जिले को 90 करोड़ रुपये दिये लेकिन इसमें से 50 फीसदी ग्राम पंचायतों को वितरित हुई। 45 करोड़ रुपये जिला परिषद के हिस्से होगा। फिलहाल जिला परिषद को 30 करोड़ उपलब्ध हुए हैं और 15 करोड़ मिलने शेष हैं।

1 वर्ष का ही 103.24 करोड़ बकाया

बताते चलें कि वर्ष 2023-24 में जिला परिषद की ओर से 117.24 करोड़ रुपये से अधिक की मांग की गई थी लेकिन दिया गया मात्र 14 करोड़ 65 हजार रुपये। इस एक वर्ष का ही 103.24 करोड़ का बैकलाग था। जो बढ़ते-बढ़ते 212 करोड़ रुपयों तक पहुंच गया था।

इस वर्ष जिले के कुछ भाजपा पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री व पालक मंत्री से जिला परिषद का संपूर्ण बकाया मुद्रांक शुल्क देने की मांग रखी थी। सीईओ ने भी इस ओर ध्यान दिलाया था जिसके चलते बीते कुछ वर्षों की तुलना में अधिक अनुदान मिला और सेसफंड बजट 50 करोड़ के पार हो सका।

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