आष्टी के जंगलों में लगी भीषण आग ने तीसरे दिन लिया विकराल रूप; हाईवे दो घंटे बंद
Ashti Forest Fire: महाराष्ट्र के आष्टी तहसील के जंगलों में लगी भीषण आग ने तीसरे दिन विकराल रूप लेकर तेलाई घाट और राष्ट्रीय राजमार्ग को प्रभावित किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
Telai Ghat Fire (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Telai Ghat Wildfire Maharashtra: आष्टी तहसील के जंगलों में लगी आग ने तीसरे दिन विकराल रूप धारण कर लिया और तेलाई घाट क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण आग के कारण आष्टी-वरुड राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत येणाडा जंगल क्षेत्र से हुई थी, जो सुजातपुर बीट होते हुए पोरगांव्हाण जंगल तक फैल गई। तीसरे दिन यह आग बढ़ते हुए तेलाई घाट तक पहुंच गई। दोपहर करीब एक बजे आग ने सड़क के दोनों ओर तेजी से फैलकर विकराल रूप ले लिया।
आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि कुछ समय के लिए सड़क पर आवागमन पूरी तरह बंद करना पड़ा। इस आग में मलकापुर बीट तथा तेलाई मंदिर के आसपास का बड़ा जंगल क्षेत्र जलकर खाक हो गया। कई बड़े पेड़ जलकर गिर पड़े, जबकि छोटे पौधे भी पूरी तरह नष्ट हो गए। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के बिट गार्ड चार मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचे और उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन भीषण आग के आगे
उनके प्रयास नाकाम साबित हुए।
उच्चस्तरीय जांच -दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
बताया गया कि 28 तारीख को शाम करीब 6 बजे एक महिला विट गार्ड मजदूरों के साथ जान जोखिम में डालकर आग बुझाने का प्रयास कर रही थी। हालांकि, उसकी मदद के लिए वन विभाग की ओर से कोई अतिरिक्त गश्ती दल या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई, आग तेलाई मंदिर परिसर स्थित वनपाल कार्यालय के सामने तक पहुंच गई और समीप के खेतों से लगे बगीचे को भी नुकसान पहुंचा।
सम्बंधित ख़बरें
किसान की शिकायत पर खुली डीजल चोरी की पोल, वडनेर पुलिस ने किया मामला दर्ज
वर्धा में भीषण गर्मी का कहर, 47°C के पार तापमान; 25 मई तक रेड अलर्ट जारी
वर्धा में डीजल संकट से किसान परेशान, थमे ट्रैक्टरों के पहिए; खरीफ की तैयारी प्रभावित
समृद्धि हाईवे पर बढ़े हादसे, वर्धा ट्रैफिक पुलिस अलर्ट; तेज रफ्तार और लापरवाही बन रही मौत की वजह
बगीचे में मौजूद नीम के पेड़ भी आग की चपेट में आकर झुलस गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग द्वारा हर साल पौधारोपण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और पौधों की सिंचाई के लिए टैंकरों का उपयोग किया जाता है, लेकिन आग लगने के समय ये संसाधन उपलब्ध नहीं रहते। इससे वन संपदा के नुकसान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस आगजनी से क्षेत्र के वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
220 केवी उपकेंद्र में लगातार 2 दिन आग
हिंगनघाट के राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सगुना फैक्ट्री के पास 220 केवी विद्युत उपकेंद्र (वणी) में लगातार दो दिनों तक भीषण आग लगने की घटनाएं सामने आई है। 28 व 29 अप्रैल की दोपहर को लगी इन आग की घटनाओं से इलाके में हड़कंप मच गया। तापमान बढ़ने से ऐसी घटनाएं होने की आशंका जताई जा रही है। इन दोनों घटनाओं में हिंगनघाट नगर पालिका की अग्निशमन टीम तुरंत मौके पर पहुंची और समय रहते आग पर काबू पा लिया, अग्निशमन दल की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन लगातार आग लगने की घटनाओं से नागरिकों में चिंता बढ़ गई है।
विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
लगातार उपकेंद्र में आग लगने की घटनाओं के कारण विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुरक्षा मानकों (सेपटी नॉर्म्स) के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं और योजना होना जरूरी है, लेकिन मौके पर ऐसी कोई ठोस व्यवस्था मौजूद नहीं होने की जानकारी अग्निशमन विभाग ने दी है। इससे आने वाले समय में बड़ी दुर्घटना की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। आग पर नियंत्रन पाने के लिए अग्निशमन अधिकारी गौरव मागार के मार्गदर्शन में सुनील डोलस, वैभव एलगंदेवार, ईश्वर मुंजेवार, ओम लड़ी और अमित्त सहारे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, अब इन घटनाओं की गहन जांच कर उपकेंद्र पर आवश्यक सुरक्षा उपाय तुरंत लागू करने की मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है।
