

Amravati Women Hospital Nicu Fire Accident: अमरावती जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में सोमवार को हुई हृदयविदारक घटना से पूरा राज्य हिल गया। हादसे के बाद सरकारी व्यवस्था की कई खामियां एक के बाद एक सामने आने लगी हैं। खास बात यह है कि अग्निसुरक्षा जांच की अवधि समाप्त होने के महज तीन दिन बाद यह दुर्घटना हुई, जिससे पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हादसे में घायल सभी 36 नवजातों का पीडीएमसी और निजी अस्पतालों में उपचार जारी है तथा उनके स्वास्थ्य में सुधार बताया जा रहा है। डाक्टरों की टीम कड़ी निगरानी कर रही है। वहीं अस्पताल परिसर में परिजनों की भीड़ लगी है।
सूत्रों के अनुसार, जिले के सभी सरकारी अस्पतालों का अग्निसुरक्षा ऑडिट अब तक पूरा नहीं हुआ है। अचलपुर उपजिला अस्पताल और दर्यापुर उपजिला अस्पताल का फायर ऑडिट भी लंबित बताया जा रहा है। हादसे के बाद संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है।
मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच के लिए गठित सात सदस्यीय विशेष टीम बुधवार को मुंबई से अमरावती पहुंचेगी। टीम करीब एक सप्ताह तक रहकर घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। अधिकारियों, कर्मचारियों, चिकित्सकों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी लेने के साथ दस्तावेजों व रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
संभावित प्रशासनिक लापरवाही की भी पड़ताल कर टीम अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपेगी। मुंबई की टीम ने शुरू की बिजली जांच राज्य सरकार ने मंगलवार को बिजली व्यवस्था की जांच के लिए मुंबई से विशेष दल अमरावती भेजा। दल ने पूरे नवजात गहन कक्ष की विद्युत व्यवस्था की बारीकी से जांच की।
लेकर हादसे को राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कांग्रेस के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार बुधवार को घटनास्थल का दौरा कर समीक्षा करेंगे। उबाठा की नेता सुषमा अंधारे भी अमरावती पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण करेंगी और अधिकारियों से चर्चा करेंगी।
तीन नवजातों की मौत के बाद केवल जांच समितियां गठित करना पर्याप्त नहीं है। हादसे के लिए यदि निर्माण, बिजली व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन या प्रशासनिक स्तर पर किसी की लापरवाही सामने आती है। तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करना जरूरी होगा। फिलहाल निगाहें जांच रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
अमरावती जिला महिला अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। गंभीर स्थिति वाले नवजातों के गहन कक्ष को आपात स्थिति में त्वरित निकासी की सुविधा के लिए निचली मंजिल पर होना चाहिए, लेकिन यह कक्ष तीसरी मंजिल पर है। घटना के दिन लिफ्ट भी बंद थी। विस्फोट के बाद डॉक्टरों, नर्सों और बच्चों के परिजनों को घायल नवजातों को लेकर सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ा। विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी और जनप्रतिनिधियों को भी सीढ़ियों से ही घटनास्थल तक पहुंचना पड़ा।