वरुड में डेयरी व्यवसाय पर महंगाई की मार, पशुचारे के बढ़े दामों से किसान परेशान
Amravati Agriculture News: अमरावती जिले के वरुड तहसील में बढ़ती महंगाई और पशुचारे की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण डेयरी व्यवसाय संकट में आ गया है। पशुपालकों का कहना है कि दूध के दाम स्थिर हैं।
Amravati Agriculture (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Amravati Dairy Business Crisis: वरुड तहसील के ग्रामीण इलाकों में कृषि के पूरक व्यवसाय के रूप में बड़े पैमाने पर दुग्ध डेयरी व्यवसाय किया जाता है। इस व्यवसाय ने स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार दिया है और पलायन रोकने में मदद की है। लेकिन वर्तमान में बढ़ती महंगाई के कारण पशु आहार बेहद महंगा हो गया है और ऊपर से कड़क धूप व भीषण गर्मी के कारण दुधारू पशुओं को संभालना अत्यंत कठिन हो गया है। पशुखाद्य की कीमतें तेजी से बढ़ने के बावजूद दूध के दाम में अपेक्षित वृद्धि न होने से तहसील के दूध उत्पादक किसानों का आर्थिक गणित पूरी तरह बिगड़ गया है।
वरुड तहसील में भैंसों और संकरित गायों की संख्या अधिक है और कई परिवारों की पूरी अर्थव्यवस्था इसी डेयरी व्यवसाय पर निर्भर है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के कारण यह पारंपरिक आधार डगमगाता नजर आ रहा है। युद्ध की स्थिति और अन्य कारणों से बाजार में पशुखाद्य के दाम आसमान छू रहे हैं, जबकि उसकी तुलना में दूध के दाम काफी कम हैं।
वरुड के पशुपालकों ने दूध के दाम बढ़ाने की उठाई मांग
वर्तमान में भैंस के दूध की कीमत फैट के अनुसार न्यूनतम 70 से 80 प्रति लीटर और गाय के दूध की कीमत न्यूनतम 50 से 70 प्रति लीटर है। ऊपर से देखने पर यह दाम भले ही अच्छा लगे, लेकिन पशुचारे पर होने वाले दैनिक खर्च को देखते हुए किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बढ़ती लागत से परेशान दुग्ध व्यवसायियों ने सरकार से दूध के दाम बढ़ाने या सीधे सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता देने की मांग की है।
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डेयरी व्यवसाय छोड़ने की कगार पर किसान
यदि दूध के दामों में सुधार नहीं हुआ, तो कई पशुपालकों को यह व्यवसाय बंद करना पड़ सकता है। दुग्ध व्यवसाय की रीढ़ माने जाने वाले पशुखाद्य के बाजार भाव इस समय नियंत्रण से बाहर हैं। सिंगल कड़बा 2,500 से 3,000 प्रति कड़ा बिक रहा है। वहीं मुरघास साइलेज 8 हजार से 10 हजार रुपए प्रति टन, सरसों/कपास की खली सरकी पेंड 1 हजार 700 से 1 हजार 900 48 किलो, मूंगफली की खली शेंग पेंड 1 हजार 400 से 1 हजार 700 40 किलो, मक्का कुट्टी 1 हजार 150 45 किलो के दाम में बिक रहे हैं।
पशुचारे की कीमतें आसमान पर
दुध व्यवसाय के लिए मुख्य मानेवाले पशु खाद्य के दाम बढ़ गए हैं। जिससे लागत का खर्च पशुओं की देखभाल से कहीं अधिक बढ़ गया है। दुध उत्पादक किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। उत्तमराव पोटोडे, उपसरपंच, बेनोडा शहीद खर्च हो गया दोगुना बढ़ती गर्मी के कारण पशुओं का दूध उत्पादन घट गया है, लेकिन उनकी देखभाल का खर्च दोगुना हो गया है। डॉक्टरों की फीस, दवाइयां और पशुओं को ठंडा रखने के उपायों के कारण बजट पूरी तरह से चरमरा गया है।
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अमरावती में डेयरी उद्योग संकट
खर्च की तुलना में दूध के दाम कम होने से घर चलाना मुश्किल है। इसीलिए अब मैं डेयरी व्यवसाय को सीमित कर कम खर्च वाले अन्य वैकल्पिक व्यवसायों की जानकारी जुटा रहा हूं। प्रफुल कदम मदर डेयरी संकलन केंद्र, बेनोडा शहीद दूध के दाम बढ़ाएं निजी कंपनियों ने दूध की पैकेजिंग पर दो से तीन रुपये बढ़ा दिए हैं, लेकिन दूध उत्पादक किसानों को मिलने वाले दाम वही रखे हैं।सरकार से अपील है कि किसानों के दूध के दामों पर भी विचार किया जाए। प्रिया मंगेश राउत अनुश्री दूध डेयरी, बेनोडा शहीद
