“विठ्ठला… सरकार को विवेकबुद्धी दे!”, आषाढ़ी एकादशी पर बच्चू कडू ने भरी हुंकार
प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू ने भगवान विठ्ठल से एक ऐसी प्रार्थना की, जो अब पूरे प्रदेश की सियासत में खलबली मचा रही है। यह कोई साधारण प्राथना नहीं है।
- Written By: आंचल लोखंडे
आषाढ़ी एकादशी पर बच्चू कडू ने भरी हुंकार (सौजन्यः सोशल मीडिया)
अमरावती: पूरा महाराष्ट्र आषाढ़ी एकादशी पर भक्तिभाव में सराबोर है इस बीच प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू ने भगवान विठ्ठल से एक ऐसी प्रार्थना की, जो अब पूरे प्रदेश की सियासत में खलबली मचा रही है। यह कोई साधारण प्राथना नहीं है। सोशल मीडिया पर उनकी यह भावुक पोस्ट अब वायरल हो चुकी है। जिसमें उन्होंने विठोबा से हाथ जोड़कर कहा कि “हे विठ्ठला, अब तो सरकार को कर्जमाफी देने की विवेकबुद्धी दे!”…
बच्चू कडू की पोस्ट में आँकड़ों से ज़्यादा आंसुओं की गूंज है। उन्होंने लिखा “पिछले 3 महीनों में 767 किसानों ने आत्महत्या की। जो किसान पूरे देश का पेट भरता है, वो आज खुद भूखा सोने को मजबूर है। मेहनत करने वाला किसान आज अपनी ही जमीन पर बेबस खड़ा है। अगर हम अपने खून-पसीने से पैदा की गई फसल का सही दाम भी न पा सकें, तो मदद के लिए किसके आगे हाथ फैलाएं?”
“विठ्ठला, हमारे माथे पर सिर्फ़ एक ही जात-किसान”
उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि “विठ्ठल, तेरे दर पर कोई जात, धर्म, रंग नहीं देखा जाता, और हमारे माथे पर भी सिर्फ़ एक पहचान है ‘किसान’। तू राजनीति से ऊपर उठकर सरकार को इंसानियत की राह दिखा। कर्जमाफी कोई रहम नहीं, ये अन्नदाता का अधिकार है।” यह एक भक्त की विनती कम, और एक आंदोलनकारी की हुंकार ज़्यादा लग रही है जो अब जनचर्चा का विषय बन चुकी है।
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सरकारला कर्जमाफी देण्याची सदबुद्धी दे… pic.twitter.com/YWy9R9i42A — BACCHU KADU (@RealBacchuKadu) July 6, 2025
अब सिर्फ़ शब्द नहीं, पदयात्रा से होगा सवाल
बच्चू कडू सिर्फ़ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने ऐलान किया कि 7 जुलाई से 138 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू की जाएगी। यह यात्रा अमरावती जिले के पापळ गांव से शुरू होकर यवतमाल जिले के चिलगव्हाण जहां महाराष्ट्र की पहली किसान आत्महत्या हुई थी वहां तक जाएगी।
पदयात्रा जिन गांवों से होकर गुज़रेगी
पदयात्रा जिन गांवों से होकर गुज़रेगी दौंड, उंबर्डा बाजार, लोही, तरणोडी, तळेगांव, दारव्हा, लाखखिंड, चिरकूटा, तूपटाकळी, वसंतनगर, माळकिन्ही, गुंज, और अंतिम पड़ाव आंबोडा यह है। इस यात्रा और आंदोलन का उद्देश्य किसानों कि कर्जमाफी,खेत मज़दूरों और विधवाओं के अधिकार, दिव्यांगों, बेरोज़गारों, मछुआरों और मेंढपाल समाज के लिए न्याय दिलाना है।
आता मायबाप शेतकऱ्यांच्या हक्कासाठी आवाज उठवु…
७/१२ कोरा यात्रा
७ जुलै २०२५ ते १४ जुलै २०२५
पापळ (अमरावती) ते चिलगव्हाण (यवतमाळ) pic.twitter.com/OtnS4xmFJR — BACCHU KADU (@RealBacchuKadu) July 5, 2025
सरकार की कार्रवाई? सिर्फ़ ‘समिति’!
बच्चू कडू ने दो टूक कहा “हम भीख नहीं मांगते, अपना अधिकार मांगते हैं। ये यात्रा किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि शोषण के खिलाफ है।” सरकार ने अब तक कर्जमाफी पर समिति बनाई है, लेकिन समाधान अभी भी फाइलों में उलझा पड़ा है। बच्चू कडू ने तीखा सवाल उठाया कि “कर्जमाफ़ी की फाइलें चलती रहीं… और किसान मरते रहे। अब हम सिर्फ़ रिपोर्ट नहीं, निर्णय चाहते हैं।”
