Amravati: 120 साल पुरानी शकुंतला रेलवे लाइन के ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, रेलवे बोर्ड ने शुरू की जांच
Shakuntala Railway Broadgauge Project: अचलपुर-मुर्तिजापुर-दारव्हा शकुंतला रेलवे ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। 189 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की डीपीआर रेलवे बोर्ड को सौंप दी गई है।
- Written By: केतकी मोडक
शकुंतला रेलवे
Maharashtra Government Budget Capital Investment: पश्चिम विदर्भ के औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाने वाला अचलपुर-मुर्तिजापुर-दारव्हा (यवतमाल) शकुंतला रेलवे ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट अब धरातल पर गति पकड़ता नजर आ रहा है। करीब 120 वर्ष पुराना गौरवशाली इतिहास समेटे इस ऐतिहासिक नैरोगेज ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए सविस्तर परियोजना रिपोर्ट आखिरकार रेलवे बोर्ड को सौंप दिया गया है। मध्य रेलवे प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने इस विस्तृत रिपोर्ट की तकनीकी छानबीन और समीक्षा का काम बेहद गंभीरता से शुरू कर दिया है।
ब्रिटिश कालीन कंपनी के मालिकाना हक के कारण अटका था प्रोजेक्ट
विदर्भ क्षेत्र में ‘शकुंतला’ के नाम से बेहद लोकप्रिय यह पुरानी रेलवे लाइन ब्रिटिश काल की ‘सेंट्रल प्रोविंस रेलवे कंपनी’ के मालिकाना हक से जुड़ी हुई थी। इस निजी कंपनी के साथ रॉयल्टी और तकनीकी स्वामित्व से जुड़ी पेचीदा कानूनी दिक्कतों के कारण यह महत्वपूर्ण रेल मार्ग दशकों से लंबित पड़ा हुआ था। इस रूट के बंद होने से अमरावती, यवतमाल और अकोला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क मुख्य रेल नेटवर्क से टूट गया था। लंबे इंतजार और निरंतर किए गए प्रयासों के बाद अब इसका आधुनिक डीपीआर पूरी तरह तैयार कर लिया गया है।
महाराष्ट्र सरकार ने बजट में दिया पचास प्रतिशत वित्तीय हिस्सा
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को गति देने के लिए साल 2017 में राज्य के ‘कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम’ के तहत महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अपनी तरफ से 50 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी (फंडिंग) देने की सैद्धांतिक सहमति जताई थी। इसके बाद फरवरी 2024 के राज्य के मुख्य बजट में महायुति सरकार ने इस 50 फीसदी राशि का आवश्यक वित्तीय प्रावधान भी कैबिनेट स्तर पर कर दिया था, जिससे फंड की सबसे बड़ी समस्या हल हो गई थी।
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प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के तहत रेलवे बोर्ड ने इस पूरे प्रोजेक्ट के काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे दो मुख्य हिस्सों में विभाजित किया है। इसमें पहला हिस्सा यवतमाल से मुर्तिजापुर और दूसरा हिस्सा मुर्तिजापुर से अचलपुर तय किया गया है।
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हालांकि, इस व्यवस्था पर शकुंतला रेलवे विकास समिति के संस्थापक व मुख्य समन्वयक अक्षय पांडे ने रेलवे प्रशासन के सामने एक विशेष मांग रखी है। उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड इस टुकड़ों वाली नीति को छोड़कर पूरे 189 किलोमीटर लंबे यवतमाल-मुर्तिजापुर-अचलपुर मार्ग को एक साथ सिंगल टेंडर में मंजूरी प्रदान करे। इसके साथ ही विदर्भ के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए इस मार्ग को भारतीय रेलवे की ‘विशेष परियोजना’ का आधिकारिक दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि काम बिना किसी रुकावट के समय सीमा के भीतर पूरा हो सके।
