Amravati News: डकैती और लूट पर पुलिस का कमांड सतीश तायडे नवभारतअमरावती. शहर की सुरक्षा व्यवस्था की एक मिलीजुली तस्वीर सामने आई है. साल 2026 की शुरुआत 1 जनवरी से 2 अप्रैल के आंकड़ों की तुलना पिछले वर्ष की इसी अवधि से करने पर पता चलता है कि जहां संगीन अपराधों डकैती और लूट में उल्लेखनीय कमी आई है, वहीं चोरी और मारपीट की घटनाएं अब भी पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं. पिछले वर्ष इसी अवधि में 1 टू 5 के तहत 725 मामले दर्ज हुए थे. इस वर्ष यह आंकड़ा कम होकर 648 पर पहुंच गया है.
पिछले वर्ष 31 मार्च तक शहर में 8 हत्या की घटनाएं सामने आई थी. वहीं इस वर्ष 2 अप्रैल तक 9 हत्या की घटनाएं सामने आई है. जिससे अब यह आंकड़ा सालभर कितने उछलेगा या फिर पुलिस इसे रोकेंगी, यह देखना होगा. इसी तरह पिछले वर्ष हत्या के प्रयास के 8 मामले दर्ज हुए थे. वहीं इस वर्ष 2 अप्रैल तक कुल 14 मामले दर्ज किए गए है. जिससे मारपीट की घटनाओं की वृद्धि होने की बात सामने आई है.
आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस साल डकैती और जबरन लूट के मामलों में भारी कमी दर्ज की गई है. पिछले साल जहां मार्च अंत तक 28 लूट की वारदातें हुई थीं, इस साल यह आंकड़ा घटकर मात्र 12 रह गया है. यह पुलिस की गश्त और सक्रियता का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है. पिछले वर्ष इसी कालावधि में डकैती की 4 वारदातें हुई थी, जो इस वर्ष अब तक सिर्फ 1 घटना सामने आई है.
शहर में होने वाली आम चोरी की घटनाओं में भी बड़ी राहत मिली है. पिछले वर्ष के 119 मामलों के मुकाबले इस साल 80 मामले ही दर्ज हुए हैं. हालांकि वाहन चोरी के 76 मामले अब भी एक सक्रिय समस्या बनी हुई है. पिछले वर्ष 31 मार्च तक 88 वाहन चोरी हुए थे.
पुलिस रिपोर्ट में एक चिंताजनक पहलू महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध हैं. जबरन संभोग/अप्राकृतिक संभोग की श्रेणी में मामले 10 से बढ़कर 15 हो गए हैं. हालांकि विनयभंग के मामलों में 50 से घटकर 49 मामूली सुधार दर्ज किया गया.
शारीरिक चोट पहुंचाने मारपीट के मामलों की संख्या सबसे अधिक 133 है, जो शहर में आपसी विवादों की स्थिति को दर्शाती है. वहीं प्राणघातक और मामूली दुर्घटनाओं के मामलों में इस साल उछाल देखा गया है. पिछले साल 89 के मुकाबले इस साल 108 हुए है.
अमरावती शहर में कुल अपराधों की संख्या 725 से घटकर 648 पर आ गई है, जो कानूनव्यवस्था के मोर्चे पर एक अच्छी खबर है. लेकिन हत्या, दुष्कर्म और सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़े पुलिस प्रशासन के लिए आगामी महीनों में कड़ी चुनौती पेश करेंगे.