Bhandara News: योजना लागत घटी, मुनाफा बढ़ा, प्राकृतिक खेती बना सहारा 3,375 किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती मुख्य चुनौतियां देशी गायों की कमी गोबरगोमूत्र की कमी मजदूरों की कमी कृषि सखी मास्टर ट्रेनर 54 प्रशिक्षण जीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क वार्षिक अनुदान 4000 रुपये प्रति किसान कुल फंड 1.09 करोड़ रुपये मुख्य फसलें धान, मिर्च, फल बागान, हरी सब्जियां
रासायनिक खादों के बढ़ते उपयोग से खराब हो रही जमीन की सेहत सुधारने और लोगों को विषमुक्त भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है. वर्ष 202425 से शुरू इस अभियान का विस्तार अब जिले के सभी 7 तहसीलों तक हो चुका है और अब तक 3,375 किसानों ने इसमें पंजीयन कराया है.
अभियान का विस्तार और संरचना इस योजना के तहत जिले में 27 किसान समूह क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. समूह आधारित पद्धति से किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा रहा है. 54 कृषि सखी बनीं मास्टर ट्रेनर किसानों को जीवामृत, बीजामृत और दशपर्णी अर्क बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके लिए 54 कृषि सखियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया गया है, जो गांवगांव जाकर किसानों को तकनीकी जानकारी दे रही हैं.
हर क्लस्टर में कृषि सखी, सहायक कृषि अधिकारी और अन्य कृषि कर्मियों की टीम किसानों की मदद कर रही है. 1,350 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती जिले में वर्तमान में 1350 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है. इसमें धान, फल बागान, मिर्च और हरी सब्जियों की खेती शामिल है. इस पद्धति से रासायनिक खादों पर खर्च कम होने के कारण किसानों की उत्पादन लागत में औसतन 20 से 25 प्रतिशत तक कमी आई है.
आर्थिक सहायता और योजनाएं इस मिशन के अंतर्गत पंजीकृत किसानों को प्रति वर्ष 4000 रुपये का प्रोत्साहन अनुदान दिया जा रहा है. साथ ही, जैविक खाद और जीवामृत को बढ़ावा देने के लिए हर दो क्लस्टर पर एक जैविक इनपुट सेंटर स्थापित करने की योजना है.
पिछले वर्ष इस अभियान के लिए जिले को 1 करोड़ 9 लाख रुपये का फंड मिला, जिसका पूरा उपयोग किया गया. रासायनिक खादों के उपयोग में कमी पीजीएसइंडिया के तहत 27 क्लस्टरों का पंजीकरण किया गया है.