

PM MITRA 150 Plots Cancelled In Amravati: महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के अमरावती स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी करने वाले भूखंडधारकों पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है।
शहर के पुराने बायपास स्थित एमआईडीसी और नांदगांव पेठ औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने की समयसीमा बीत जाने के बाद भी काम शुरू न करने वाले 500 से अधिक भूखंडधारकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से 150 भूखंडों के करार पूरी तरह रद्द कर दिए गए हैं।
दूसरी ओर, विभिन्न कारणों से दम तोड़ चुके 160 कार्यरत उद्योगों पर भी ताला लटक गया है। जिले के दोनों प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों (पुराना बायपास और नांदगांव पेठ) में उद्योग विकास को गति देने के लिए व्यापक स्तर पर भूखंड उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन नियम के अनुसार, भूखंड आवंटन के बाद 5 वर्षों के भीतर उद्योग स्थापित कर परिचालन शुरू करना अनिवार्य होता है।
लगातार तीन कारण बताओ नोटिस देने के बाद भी यदि काम शुरू नहीं होता, तो आवंटन रद्द करने का प्रावधान है। कई मामलों में 10 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।
एक तरफ जहां पुराने भूखंडधारकों पर कार्रवाई हो रही है, वहीं केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी 'पीएम मित्र' योजना से अमरावती के औद्योगिक परिदृश्य को बड़ा बल मिला है। पीएम मित्र के तहत 75 हेक्टेयर क्षेत्र में 3 बड़ी कंपनियों को भूखंड मंजूर हो चुके हैं। नीदरलैंड की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी सहित 10 से 15 बड़े उद्योगों की स्थापना प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
देश के 7 चुनिदा टेक्सटाइल पार्कों में से एक अमरावती में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 410 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। नया उद्योग शुरू करने के लिए अब 'मिलाप पोर्टल' के जरिए आवेदन करना होता है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद एमआईडीसी द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर भूखंड का करारनामा निष्पादित किया जाता है।
30 जून तक एमआईडीसी में औद्योगिक भूखंडों की दर 590 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी। हालांकि, बढ़ती मांग और पीएम मित्र पार्क के कारण विकसित हो रहे औद्योगिक माहौल को देखते हुए दरों में संशोधन कर इसे 1,221 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है।
दोनों औद्योगिक क्षेत्रों को मिलाकर कुल 1,932 औद्योगिक भूखंड है। इनमें से 1,548 भूखंडों का आवंटन हो चुका है, जबकि 384 भूखंड अभी भी उपलब्ध है। वर्तमान में क्षेत्र में केवल 870 उद्योग ही सुचारू रूप से चल रहे हैं। 160 उद्योग वित्तीय संकट और व्यक्तिगत कारणों से बंद पड़ चुके हैं।