मेलघाट में जलसंकट की दस्तक: 50 गांवों में कुएं सूखने की कगार पर; 'नल तो हैं पर जल कहाँ?' ग्रामीणों का सवाल

Amravati News: मेलघाट के धारणी और चिखलदरा में जलसंकट। जल जीवन मिशन के बुनियादी ढांचे के बावजूद जलस्रोत सूखने से 50 गांवों पर प्यास का साया। ग्रामीणों ने ठोस जल प्रबंधन नीति और चेकडैम की मांग की है।
Severe water crisis hits Melghat's Dharni & Chikhaldara. Despite Jal Jeevan Mission infra, depleting water tables threaten 50 villages. Locals demand sustainable water management policies.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Updated on

Melghat Geographical Challenges News: अमरावती में कुपोषण, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और विकास की सीमाओं से जूझ रहे मेलघाट क्षेत्र पर अब एक बार फिर जलसंकट का साया मंडराने लगा है। गर्मी की आहट के साथ ही आदिवासी बहुल धारणी और चिखलदरा तहसील के कई गांवों में कुओं का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले कुछ ही सप्ताह में अनेक कुएं पूरी तरह सूख सकते हैं, जिससे करीब 50 से अधिक गांवों में भीषण पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। मेलघाट का पहाड़ी और पथरीला भूगोल पानी संचयन के लिए अनुकूल नहीं है।

ढलानदार, मुरमाड और चट्टानी जमीन के कारण वर्षा का पानी जमीन में समाने के बजाय तेजी से बह जाता है। परिणामस्वरूप भूजल स्तर अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ पाता। छोटी नदियों पर बने बांध और जलस्रोत भी गर्मी की शुरुआत में ही सूखने लगते हैं। एकताई, हतरू, चिलाटी, राहू, बिबा, खडीमल, घाना, कवडाझिरी, रानीगांव, रायपुर, चौराकुंड, तासबांदा, चिखली जैसे दुर्गम और अतिदुर्गम गांवों में हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। कई स्थानों पर कुओं का जलस्तर तलहटी तक पहुंच चुका है।

महिलाओं और बच्चों पर बढ़ेगा बोझ

यदि स्थिति और बिगड़ी तो महिलाओं को फिर से सिर पर घड़े रखकर मीलों पैदल चलकर पानी लाना पड़ेगा। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। जलसंकट केवल पेयजल की समस्या नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन और सामाजिक जीवन से जुड़ा व्यापक संकट बन जाता है।

'हर घर नल से जल' योजना पर प्रश्नचिह्न

केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन 'हर घर नल से जल के तहत अमरावती जिला परिषद द्वारा गांव-गांव में नल कनेक्शन, टंकियां और पाइपलाइन बिछाई गई हैं। बुनियादी ढांचा तो खड़ा है, लेकिन यदि जलस्रोत ही सूख गए तो इन सुविधाओं का क्या उपयोग? "नल हैं, टंकियां हैं, पर पानी ही नहीं तो योजना का लाभ कैसे मिलेगा?" ऐसा सवाल ग्रामीणों ने उपस्थित किया।

ठोस उपाय करने की जरूरत

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से नदी-नालों पर चेकडैम (लघु बांध) निर्माण, भूजल पुनर्भरण परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष जल संरक्षण योजना, जलस्त्रोतों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और क्षमता वृद्धि करने, मेलघाट के लिए स्वतंत्र, शाश्वत जल प्रबंधन नीति तैयार करने की मांग की है।

भौगोलिक कारण

  • पहाड़ी और पथरीला क्षेत्र
  • ढलानदार एवं मुरमाड जमीन
  • वर्षा जल का तेज बहाव
  • भूजल स्तर में पर्याप्त वृद्धि नहीं

ग्रामीणों की मांग

  • नदी-नालों पर चेकडैम निर्माण
  • भूजल पुनर्भरण परियोजना
  • विशेष जल संरक्षण योजना
  • वैज्ञानिक सर्वेक्षण

चेतावनी की घंटी

जलस्तर में तेज गिरावट आने वाले दिनों में बड़े संकट का संकेत दे रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मेलघाट के आदिवासी परिवारों को एक बार फिर पानी के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। मेलघाट की पहाड़ियों से उठती यह प्यास केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। अब देखना यह है कि योजनाएं कागजों तक सीमित रहेंगी या सचमुच जीवनदायी जलधारा गांवों तक पहुंचेगी।

Navbharat Live
navbharatlive.com