Amravati City: गाविलगड किला के संरक्षण को लेकर स्वराज्य सेवा प्रतिष्ठान और दुर्गप्रेमियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि ऐतिहासिक धरोहर प्रशासनिक उपेक्षा के कारण जर्जर अवस्था में पहुंच गई है और इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है.
पर्यटन सुविधाओं के अभाव पर उठे सवालयह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI के अधीन है, लेकिन इसकी तटबंदी, दरवाजे और आंतरिक संरचनाएं लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं. संगठन ने मांग की है कि विशेष निधि उपलब्ध कराकर विशेषज्ञों की देखरेख में मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य जल्द शुरू किए जाएं. दुर्गप्रेमियों ने यह भी बताया कि किले की पारंपरिक जल व्यवस्था जैसे प्राचीन कुएं और तालाब उपेक्षा का शिकार हैं, जिन्हें पुनर्जीवित करना आवश्यक है.
साथ ही, हर साल लगने वाली आग से किले के प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक अवशेषों को नुकसान पहुंच रहा है, इसलिए आग से बचाव के उपाय भी जरूरी बताए गए हैं. बुनियादी सुविधाओं का अभावपर्यटन के दृष्टिकोण से भी किले पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. पर्यटकों के लिए पेयजल, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल गाइड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है.
इसके अलावा, गाविलगड रिसर्च सेंटर स्थापित कर इतिहासकारों और विद्यार्थियों को शोध के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव भी दिया गया है. स्थानीय नागरिकों और संस्थाओं की भागीदारी से किले के बेहतर प्रबंधन के लिए एक विशेष कार्यबल स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने की भी मांग की गई है. स्वराज्य सेवा प्रतिष्ठान का कहना है कि यह किला विदर्भ की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए गाविलगड विकास योजना को जल्द लागू किया जाना चाहिए.