अच्छी बारिश के बाद खरीफ बुआई ने पकड़ी रफ्तार, किसानों ने कपास को दी प्राथमिकता
Kharif Sowing: धामणगांव रेलवे क्षेत्र में अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुआई तेज हो गई है। कावली, वसाड और मंगरूल दस्तगीर सहित आसपास के गांवों में 70 से 80 प्रतिशत तक बुआई पूरी हो चुकी है।
Kharif Crops (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Dhamangaon Railway News: धामणगांव रेलवे क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हुई अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुआई ने रफ्तार पकड़ ली है। कावली, वसाड और मंगरूल दस्तगीर सहित आसपास के गांवों में किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों में जुटे हैं। इस वर्ष अधिकांश किसानों ने सोयाबीन की तुलना में कपास की खेती को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर कपास की बुवाई की गई है। कृषि जानकारों के अनुसार क्षेत्र में लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक बुआई पूरी हो चुकी है।
बुआई मृग नक्षत्र में बुवाई पर किसानों का भरोसा किसानों का मानना है कि मृग नक्षत्र में की गई बुवाई से फसल की बढ़वार अच्छी होती है और रोगों का प्रकोप भी कम रहता है। इसी विश्वास के चलते कई किसानों ने कपास के साथ अरहर तुअर की भी बुआई की है। हालांकि कुछ स्थानों पर जंगली जानवरों ने अरहर की फसल को नुकसान पहुंचाया है और कई खेतों में पौधों को उखाड़ दिया है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ी है।
धामणगांव क्षेत्र में 80% खरीफ बुआई पूरी
बारिश का इंतजार, फिर खेतों में लौटी रौनक मानसून की देरी के कारण किसानों को लंबे समय तक बारिश का इंतजार करना पड़ा। कई किसानों ने स्प्रिंकलर सिंचाई के सहारे कपास की फसल बचाने का प्रयास किया, लेकिन अंततः खेती पूरी तरह बारिश पर ही निर्भर रही। पर्याप्त वर्षा होने के बाद अब सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने भी कपास और सोयाबीन की बुआई शुरू कर दी है।
सम्बंधित ख़बरें
राज ठाकरे ने मनसे पदाधिकारियों को दिया अल्टीमेटम, बोलें- ‘निष्क्रिय मत बैठो, तुरंत काम में जुट जाओ’
उधर एकनाथ शिंदे का ऑपरेशन टाइगर, इधर फ्लाइट में एक साथ दिखे सीएम फडणवीस और उद्धव ठाकरे; सियासी हलचल तेज
Mumbai News: भायंदर-बोरीवली के बीच जंबो ब्लॉक, रविवार को दिन में नहीं होगा ब्लॉक
सूरत में जुटेंगे देश भर के टेक्सटाइल व्यापारी, भारतीय व्यापार महोत्सव की लॉन्चिंग
खेतों में ट्रैक्टरों की आवाजाही बढ़ गई है और अधिकांश किसान तेजी से बुवाई पूरी करने में जुटे हैं। महंगे बीज और बढ़ती लागत बनी चुनौती किसानों का कहना है कि बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
बारिश से किसानों में लौटी उम्मीद
महंगे बीजों के कारण दोबारा बुवाई करना आर्थिक रूप से संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने पर्याप्त बारिश होने तक इंतजार किया। खेती की बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और फसलों के उचित दाम नहीं मिलने से किसान पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं।
ये भी पढ़े: मुंबई की 25 हजार इमारतों को ओसी देने का प्रस्ताव अटका, स्थायी समिति ने उठाए कई सवाल
बारिश से जगी नई उम्मीद अच्छी बारिश के बाद पूरे क्षेत्र में किसानों और खेतिहर मजदूरों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है। बैलों की संख्या कम होने के कारण इस बार अधिकांश किसानों ने ट्रैक्टर की मदद से खेत तैयार कर बुआई की। बारिश की कामना को लेकर क्षेत्र में कई धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे। अब वर्षा होने के बाद किसान पूरी तरह खेती के काम में जुट गए हैं और अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं।
