सरकारी फंड निजी बैंक में जमा! अमरावती DPC बैठक में भड़के मंत्री बावनकुले, कलेक्टर को दिया 8 दिन का अल्टीमेटम
Amravati DPC Meeting: अमरावती जिला नियोजन समिति (DPC) की बैठक में 500 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी फंड को लेकर बवाल हुआ। मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कलेक्टर को अल्टीमेटम दिया।
- Written By: आकाश मसने
अमरावती जिला नियोजन समिति की बैठक में मौजूद मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले व कलेकर आशीष येलेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chandrashekhar Bawankule Ultimatum To Amravati Collector: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में आयोजित जिला नियोजन समिति (DPC) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हंगामेदार रही। पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में जिला प्रशासन की गंभीर लापरवाहियों और वित्तीय अनियमितताओं की परतें उधड़ती नजर आईं। बैठक में उपस्थित सांसदों और विधायकों ने जब सरकारी फंड के खर्च और प्रबंधन को लेकर तीखे सवाल पूछे, तो जिलाधिकारी आशीष येरेकर संतोषजनक उत्तर देने में पूरी तरह असमर्थ रहे। स्थिति इतनी असहज हो गई कि भरी सभा में जिलाधिकारी को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।
कागजों पर 100% खर्च, हकीकत में कोई हिसाब नहीं
प्रशासन की ओर से पेश रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जिले के विभिन्न विभागों में आई निधि का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा चुका है। जिलाधीश द्वारा निधि का खर्च शत प्रतिशत बताया गया, जबकि रिपोर्ट में खर्च दिखाई नहीं दिया।
इसी तरह शासकीय निधि को निजी बैंक में डिपॉजिट करने को लेकर भी काफी असंतोष व्यक्त किया गया। इसको लेकर जन प्रतिनिधियों ने सवाल जवाब पूछे, जिसका जिलाधीश कोई जवाब नहीं दे पाए। इसको लेकर भरी सभा में जिलाधीश को शर्मिंदगी की नौबत आई। इस समय पालकमंत्री बावनकुले ने नाराजगी व्यक्त करते हुए आगामी 8 दिनों में जिला नियोजन निधि का विस्तृत लेखा-जोखा तैयार करने का आदेश दिया।
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उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों में नागरिकों को तत्काल सेवा के लिए कार्यालय में आधुनिक सुविधा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रशासन को गतिमान बनाने शक्तिमान योजना की घोषणा की है। इसमें शासकीय कार्यालय में कंप्यूटर, सीसीटीवी, प्रिंटर, प्रोजेक्टर सह कार्यालय को लगने वाले आधुनिक साहित्य खरीदने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिले के प्रमुख कार्यालय जिसमें समाज कल्याण, जल संपदा, आदिवासी, कृषि, लोक निर्माण जैसे अन्य प्रमुख विभाग के लिए 10 करोड़ की निधि का प्रावधान किया गया है।
नियोजन भवन, अमरावती येथे जिल्हा नियोजन समितीची बैठक घेऊन आर्थिक वर्ष २०२६-२७ साठीच्या जिल्हा वार्षिक नियोजन आराखड्याचा सविस्तर आढावा घेतला. जिल्ह्यातील सर्व लोकप्रतिनिधींसोबत विविध विकासकामांवर चर्चा करून संबंधित अधिकाऱ्यांना आवश्यक निर्देश दिले. माझ्यासमवेत यावेळी खा.… pic.twitter.com/YJ65xl3678 — Chandrashekhar Bawankule (@cbawankule) July 17, 2026
बच्चू कडू बोले- बैठक पूरी तरह असफल
इस संदर्भ में सभा में अमरामती कलेक्टर आशीष येरेकर द्वारा दी गई रिपोर्ट में करीब करीब सभी विभागों में शत प्रतिशत खर्च की जानकारी दी गई थी। वस्तु स्थिति यह थी कि किसी भी विभाग में पूरा खर्च नहीं हुआ। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि यह उल्लेखित खर्च किस वस्तु की खरीदी पर किया गया। इस बारे में भी कोई स्पष्टता नहीं होने से विधायक बच्चू कडू संतप्त हो गए।
सभा में विविध विभाग के सभी प्रमुख अधिकारी मौजूद थे। इस पर बच्चू कडू ने कहा कि जब जिलाधीश के पास ही स्पष्ट लेखा जोखा नहीं है, तो वह सभा में बैठे अधिकारों से क्यों सवाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिलाधीश इस रिपोर्ट को लेकर सभा को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अपनी शैली में इस बैठक को पूरी तरह असफल बताया। कडू ने कहा कि सभा में आधी अधूरी जानकारी की वजह से जन प्रतिनिधियों का कीमती समय खराब हुआ। इस पर सभा में सन्नाटा छा गया था।
शासकीय निधि निजी बैंक में डिपॉजिट
इसी तरह विधायक संजय खोडके ने शासकीय निधि को सरकारी बैंक में जमा करने की बजाय निजी बैंक में जमा करने को लेकर महत्वपूर्ण सवाल किया। इसमें सरकार द्वारा करीब पांच सौ करोड़ से अधिक की निधि आई है, उसे सरकारी बैंक में जमा करने की बजाय निजी बैंक में किस उद्देश्य से जमा कराने को लेकर सवाल खोडके ने सभा में पूछा। शासकीय निधि को सिर्फ सरकारी बैंक में ही जमा कराई जाती है, तो इतनी बड़ी राशि निजी बैंक में जमा करने पर का कोई औचित्य नहीं। इससे इसमें शंका निर्माण हो रहीं हैं। इस पर जिलाधीश येरेकर चुप्पी साधे रहे।
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मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएंगी: पालकमंत्री
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कलेक्टर आशीष येरेकर को कहा कि इस तरह की मनमानी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होने इस बात की दखल लेने को कहा। जिला नियोजन समिति की सभा यानी जिले के विकास कामों की समीक्षा तथा नई योजना को मान्यता देना। इसमें अधिकारियों द्वारा कामों की वस्तु स्थिति को सभा के सामने रखना होता है। इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा ऐसी लापरवाही से सभा में आक्रोश नजर आया। सभा में पालकमंत्री, जिलाधिकारी सह 11 विधायक, तीन सांसद, 140 प्रमुख अधिकारी, 12 डीपीसी सदस्य मौजूद थे।
