

Rajura Irrigation Project: जिले के राजुरा मध्यम लघु सिंचाई परियोजना, वासनी मध्यम सिंचाई परियोजना तथा राजुरा गांव के पुनर्वास का मुद्दा विधायक बच्चू कड़ू ने विधान परिषद में जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन से इन मामलों पर 15 दिनों के भीतर जवाब देने की मांग की। चांदूर बाजार तहसील के राजुरा मध्यम लघु सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य पिछले एक वर्ष से ग्रामीणों के विरोध के कारण रुका हुआ है।
राजुरा प्रकल्प संघर्ष समिति ने पुनर्वास की मांग को लेकर आमरण अनशन, रास्ता रोको और विभिन्न आंदोलनकारियों के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना की मुख्य दीवार गांव से बेहद नजदीक है, जिससे भविष्य में गांव की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए लगभग एक हजार आबादी वाले राजुरा गांव का पुनर्वास किया जाए तथा परियोजना प्रभावितों को सरकारी नौकरी में भी समायोजित किया जाए।
संघर्ष समिति की मांगों के संबंध में जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुनर्वास का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विधायक बच्चू कड़ू ने इसी मुद्दे पर सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। 2021 में 193.81 लाख रुपये की मिली मंजूरी उल्लेखनीय है कि राजुरा मध्यम लघु सिंचाई परियोजना को सितंबर 2021 में 193 करोड़ 81 लाख रुपये की प्रशासकीय मंजूरी मिली थी, लेकिन धन की कमी के कारण निर्माण कार्य अब भी धीमी गति से चल रहा है।
मिलेगा 22 गांवों को लाभ विधान परिषद में विधायक बच्चू कड़ू ने वासनी मध्यम सिंचाई परियोजना का मुद्दा भी उठाया। यह परियोजना पिछले लगभग 20 वर्षों से लंबित है। इसके पूर्ण होने पर अचलपुर, दर्यापुर और अंजनगांव क्षेत्र के 22 गांवों की 4,317 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। कड़ू ने दोनों परियोजनाओं के लंबित निर्माण कार्य तथा राजुरा पुनर्वास के संबंध में सरकार से 15 दिनों के भीतर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।