अमरावती: रामलीला मैदान के शुद्धीकरण पर अरविंद सावंत का सवाल, बोले- क्या खड़गे को जय श्रीराम कहने का हक नहीं?

Amravati Ramleela Maidan: अरविंद सावंत ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान के कथित शुद्धीकरण पर जातिगत भेदभाव का सवाल उठाया। डफरीन अस्पताल अग्निकांड और नवजात मौतों पर भी चिंता जताई।
Amravati Arvind Sawant Ramleela Maidan
अरविंद सावंत सोर्स- सोशल मीडिया
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Amravati Arvind Sawant Ramleela Maidan News: अमरावती जिला रामलीला मैदान के कथित शुद्धीकरण को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जातिगत भेदभाव पर सवाल उठाए हैं।

अरविंद सावंत ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कार्यक्रम के बाद वहां शुद्धीकरण के लिए हवन-पूजन कराया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या खड़गे के अनुसूचित जाति से होने के कारण उन्हें रामलीला मैदान में जाने या 'जय श्रीराम' का नारा लगाने का अधिकार नहीं है।

अरविंद सावंत ने कहा

अरविंद सावंत ने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और जाति, पंथ, संप्रदाय या धर्म के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता। खड़गे की 8 अगस्त की रैली के दो दिन बाद एक स्थानीय धार्मिक संगठन ने मैदान में हवन-पूजन कराया था।


संगठन ने इसका कारण रैली के दौरान कथित आपत्तिजनक नारे और टिप्पणियां बताया है, जबकि भाजपा ने भी इस आयोजन से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने शुद्धीकरण की कार्रवाई को खरगे की जाति से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।

डफरीन अग्निकांड पर जताई चिंता

अमरावती के डफरीन अस्पताल में हुई आग की घटना को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने अस्पताल का जायजा लेते हुए आग से निपटने की तैयारियों, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में मौजूद कथित खामियों पर चिंता जताई।

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उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का अंदाजा ऐसी घटनाओं से लगाया जा सकता है। सावंत ने प्रशासन से अस्पतालों में अग्निसुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच और मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की।

सरकार को आज सौंपी जाएगी रिपोर्ट

अमरावती जिला महिला अस्पताल में 24 अगस्त को 3 नवजात शिशुओं की मौत का कारण बने वेंटिलेटर विस्फोट मामले में राज्यस्तरीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट 31 अगस्ता को सरकार को सौंप सकती है। रिपोर्ट पेश होने से पहले ही जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

36 नवजात बच्चों की जिंदगी खतरे में डालने वाले इस हादसे की जांच के लिए आई समिति महज एक दिन में पड़ताल पूरी कर नागपुर लौट गई ऐसे में समिति ने क्या देखा, किसकी गवाही ली और तकनीकी खराबी की जांचा कैसे की, यह अब भी रहस्य बना हुआ है।

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