

नामांकन वापसी के बाद अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 26 प्रत्याशी मैदान में।
चार उम्मीदवारों ने वापस लिया नामांकन, इनमें एड. प्रीति हर्षल रेवणे भी शामिल।
महायुति के साथ समन्वय के फैसले के बाद प्रीति रेवणे ने नाम वापस लिया।
शेखर भोयर, डॉ. संगीता शिंदे-बोंडे और श्रीकांत देशपांडे निर्दलीय उम्मीदवारों में शामिल।
प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के साथ कई निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं।
Amravati Teachers Constituency Election Independent Candidates: अमरावती विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकन वापसी के बाद 26 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। चार उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया, जिनमें युवा स्वाभिमान पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी एड. प्रीति रेवणे भी शामिल हैं। प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के साथ बागी और निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी मुकाबले में बने हुए हैं।
ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने अपने उम्मीदवारों के साथ-साथ बागियों की चुनौती से निपटने की भी परीक्षा होगी।
अमरावती विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नामांकन वापसी के अंतिम दिन चार उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। इसके बाद चुनाव मैदान में कुल 26 प्रत्याशी रह गए हैं। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है और उम्मीदवारों ने प्रचार अभियान पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।
नामांकन वापस लेने वालों में सुनील दुर्गादास राठोड, नितीन सुभाषराव आगे, सजील खान खलील खान और प्रीति हर्षल रेवणे शामिल हैं। इनमें पहले तीन निर्दलीय उम्मीदवार थे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के विशेष आग्रह के बाद युवा स्वाभिमान पार्टी के संस्थापक एवं विधायक रवि राणा ने महायुति के साथ समन्वय का फैसला लिया। इसके बाद पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी और मनपा शिक्षा सभापति एड. प्रीति हर्षल रेवणे ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
चुनाव मैदान में कांग्रेस की अदिती ऋषिकेश पोहरे, शिवसेना के किरणराव रामराव सरनाईक, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के दत्तात्रय श्रीराम लहाने, बलीराजा पार्टी के प्रा. अनिल मधुकरराव काले, भारतीय जनसम्राट पार्टी के गजानन गोविंदराव ढोके और समाजवादी गणराज्य पार्टी के सुरेश बाबूराव देवकर प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं।
इनके अलावा कई निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपना नामांकन कायम रखा है। इससे मुकाबले में उम्मीदवारों की संख्या काफी बनी हुई है।
इस चुनाव में बागी उम्मीदवार भी चर्चा में हैं। भाजपा से बगावत कर शेखर भोयर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। भाजपा bjp के राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे की बहन डॉ. संगीता सचिंद्र शिंदे-बोंडे ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला कायम रखा है।
शिवसेना के पूर्व विधायक श्रीकांत गोविंद देशपांडे भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटे हुए हैं। इनके अलावा अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी प्रचार में जुटे हैं।
नामांकन वापसी के बाद अब चुनाव प्रचार में तेजी आने की संभावना है। प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी से चुनावी मुकाबले में कई समीकरण बन सकते हैं।