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बारिश की कमी और अनियमित वितरण के कारण अमरावती जिले में सीताफल की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हुई।
चांदूर बाजार में पहले रोजाना 300-400 क्रेट सीताफल आते थे, जो इस वर्ष घटकर 30-40 क्रेट रह गए।
कपास, सोयाबीन, तुअर, चना और गेहूं की फसलों को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है।
Amravati Sitafal Production: महाराष्ट्र के अन्नदाताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पारंपरिक खेती के साथ-साथ फलों की बागवानी कर अपनी आय बढ़ाने की उम्मीद पालने वाले किसानों को इस वर्ष प्रकृति की दोहरी मार झेलनी पड़ी है। बारिश की भारी कमी के कारण जहां एक ओर खरीफ और रब्बी की मुख्य फसलें प्रभावित हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सीताफल जैसे महत्वपूर्ण मौसमी फल की पैदावार में भारी गिरावट आने से किसानों को गहरी निराशा हाथ लगी है।
राज्य में कृषि संकट और बढ़ते वित्तीय घाटे के कारण किसानों द्वारा उठाए जा रहे चरम कदमों के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में 4,248 किसानों ने आत्महत्या की थी, जो देश में सबसे अधिक थी। इसके बाद वर्ष 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 6,669 (किसान और कृषि मजदूर) तक पहुंच गया, वहीं, हाल ही में मराठवाड़ा क्षेत्र से मिले आंकड़ों के मुताबिक, केवल 1 जनवरी से 31 अगस्त 2026 के बीच 8 जिलों में वं किसानों की आत्महत्या के 653 मामले दर्ज किए गए हैं।
पिछले एक दशक में राज्य में 37 हजार से अधिक किसानों ने अपनी जान गंवाई है। ऐसी दर्दनाक स्थितियों को रोकने और किसानों की आय में विविधता लाने के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा भाऊसाहेब फुंडकर फलबाग लागवड योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत आम, काजू, अमरूद, अनार, नींबू, नारियल, सीताफल, आंवला, संतरा और मौसंबी समेत कुल 16 बारहमासी फलों के पौधों के रोपण, रखरखाव और ड्रिप सिंचाई के लिए चरणबद्ध रूप से सब्सिडी दी जाती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों ने महाडीबीटी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर अपने खेतों की मेड़ों और खाली । जमीनों पर बड़े पैमाने पर सीताफल के पौधे लगाए थे।
बारिश की कमी का सीधा असर सीताफल के उत्पादन पर पड़ा है। चांदूर बाजार के प्रमुख सीताफल व्यवसायी शहजाद पठान ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि जहां पिछले वर्षों में उनकी मंडी में रोजाना 300 से 400 क्रेट सीताफल आवक के रूप में आते थे, वहीं इस वर्ष यह घटकर मात्र 30 से 40 क्रेट प्रतिदिन पर सिमट गए है। आक्क में आई इस 90 प्रतिशत तक की गिरावट से व्यापारियों और उत्पादकों दोनों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सीताफल उत्पादक किसान सतीश आमझरे ने कहा कि विगत कई हमे सीताफल के व्यवसाय से अच्छी खासी आय हुई थी, जिससे थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन इस वर्ष बारिश की समय पर कमी और अनुचित वितरण के कारण फसलों का उत्पादन बहुत कम हुआ है, और उथित दाम भी नहीं मिल रहे है। ऊपर से सीताफल की फसल भी बुरी तरह पिट गई है, जिसके चलते इस साल हम पूरी तरह घाटे की किसानी करने को मजबूर है।
ब्राहमणवाड़ा के प्रगतिशील किसान बाबूराव आमझरे ने कहा कि किसानों को मौसमी फल फसलों से बड़ी उम्मीदें होती है। कपास, सोयाबीन, तुअर, बना और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों में पहले ही भारी नुकसान की आशंका है, और अब सीतापाल जैसे बागवानी उत्पादों की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है।