

Amravati Traffic Road Accidents: अमरावती जिले में जनवरी से अगस्त तक सड़क हादसों में 73 लोगों की मौत हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 51 मौतें हुई थीं। हादसों में बढ़ती मौतों के बीच सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत सामने आई है।
अमरावती जिले में वाहनों की संख्या और सड़क यातायात बढ़ने के साथ सड़क हादसों का सिलसिला भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। जनवरी से अगस्त तक महज आठ महीनों में जिले में 73 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई। पिछले वर्ष इसी अवधि में 51 लोगों की जान गई थी। इस तरह एक साल में हादसों में होने वाली मौतों की संख्या में 22 की वृद्धि दर्ज हुई है।
हादसों में मौत के आंकड़े भले ही बड़े महानगरों की तुलना में कम दिखाई देते हों, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले हुई वृद्धि ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिले में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बढ़ता यातायात, तेज गति, यातायात नियमों की अनदेखी और हेलमेट के इस्तेमाल में लापरवाही हादसों का जोखिम बढ़ा रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में मुंबई में 229, पुणे में 214, नवी मुंबई में 187, ठाणे में 175, नागपुर में 156 और छत्रपति संभाजीनगर में 140 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई। अमरावती में 73 मौतों का आंकड़ा इन शहरों की तुलना में कम है, लेकिन जिले में पिछले वर्ष के मुकाबले हुई वृद्धि और गंभीर रूप से घायलों की संख्या चिंता का विषय है।
धामणगांव के पास हुए भीषण हादसे में 7 देवी भक्तों की मौत की घटना ने एक बार फिर जिले में सड़क सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया। लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए केवल आंकड़े जुटाना पर्याप्त नहीं होगा। हादसों के कारणों की पहचान कर दुर्घटना संभावित मार्गों पर ठोस उपाय करना जरूरी है।
सड़क हादसे के बाद शुरुआती समय यानी गोल्डन आवर में घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। कुछ स्थानों पर एंबुलेंस पहुंचने में लगने वाला समय और अस्पतालों तक की दूरी गंभीर घायलों के लिए चुनौती बन सकती है।
ऐसे में प्रमुख हादसा संभावित मार्गों पर एंबुलेंस की उपलब्धता, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और तत्काल उपचार की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है। सड़क हादसों में मौतों को कम करने के लिए यातायात नियमों के पालन के साथ सड़क इंजीनियरिंग, वाहन चालकों में जागरूकता और त्वरित चिकित्सा सहायता पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।