चंद्रशेखर बावनकुले (फाइल फोटो)
Chandrashekhar Bawankule: फसलों के नुकसान का तुरंत पंचनामा करने के निर्देश पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिए हैं। जून, जुलाई और अगस्त महीने में हुई अतिवृष्टि के कारण बड़े पैमाने पर फसलें प्रभावित हुई हैं। केवल अगस्त महीने में ही 44 हजार 588 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिसमें से 272 हेक्टेयर जमीन पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। कपास, तुअर, सोयाबीन, धान और मक्का जैसी फसलें बड़े पैमाने में नुकसानग्रस्त हुई हैं।
अतिवृष्टि के कारण 53 परिवारों के 216 लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थलांतरित करना पड़ा। 896 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए, जबकि 14 घर पूरी तरह ढह गए। इसके अलावा 8 झोपड़ियां और गोठे (पशुधन शेड) भी नष्ट हुए। इस आपदा में 3 लोगों की मौत हुई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ। साथ ही 24 छोटे और 19 बड़े मवेशी की मौत हुई।
पालकमंत्री बावनकुले ने कहा कि किसानों को फसलों के नुकसान की हर संभव मदद दी जाएगी। सरकार की ओर से लगातार सहायता दी जाती रही है, लेकिन इसके लिए पंचनामे का पूरा होना आवश्यक है। इसलिए अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों का तात्काल पंचनामा किया जाए और इसके आधार पर आवश्यक सहायता राशि की मांग सरकार स्तर पर भेजने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
इस वर्ष जिले में औसतन 80.5 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि कुछ तहसील में संतोषजनक बारिश हुई है। कुछ तहसील में अभी भी पानी की कमी है। तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार तिवसा में (131.7%) और चांदूर रेलवे (112.1%) औसत से अधिक वर्षा हुई है। अचलपुर (62.2%) और धारणी (62.9%) में सबसे कम वर्षा हुई है, इसलिए ये क्षेत्र अभी भी बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं।
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चिखलदरा (66.2%) में भी कम वर्षा हुई है और खरीफ फसलों के लिए अतिरिक्त बारिश की आवश्यकता है। अमरावती (85.8%), भातकुली (82.1%), नांदगांव खंडेश्वर (78.1%) में लगभग संतोषजनक बारिश दर्ज की गई। वहीं मोर्शी (99.7%), दर्यापुर (99.9%), वरुड (98.9%), धामनगांव रेलवे (98.3%), चांदुरबाजार (99.4%) और अंजनगांवसुर्जी (102.5%) में बारिश लगभग औसत से ऊपर रही है।