अमरावती MLC चुनाव में कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, प्रत्याशी हर्षिजीत देशमुख अस्पताल में भर्ती
Amravati MLC Election: अमरावती MLC चुनाव के बीच कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख के 5 दिनों से लापता होने और अस्पताल में भर्ती होने से हड़कंप है। इससे भाजपा के पोटे की राह आसान हुई।
- Written By: केतकी मोडक
अस्पताल में भर्ती हर्षिजीत देशमुख
MLC Election Political Controversy In Amravati: स्थानीय स्वायत्त संस्था निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की मुश्किलें उस समय बढ़ गई, जब पार्टी प्रत्याशी हर्षिजीत देशमुख के पिछले 5 दिनों से चुनाव क्षेत्र से गायब रहने और नागपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सामने आई। चुनाव प्रचार के निर्णायक दौर में प्रत्याशी की अनुपस्थिति से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
कई कार्यकर्ता इसे पार्टी के साथ दगाबाजी मान रहे हैं। इस घटनाक्रम से चुनावी मुकाबला लगभग एकतरफा होता नजर आ रहा है और भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे की राह आसान होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस द्वारा नागपुर से लाए गए प्रत्याशी को लेकर अब डमी उम्मीदवार होने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।
संभ्रमित नजर आए कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष
कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष बबलू देशमुख ने देशमुख 5 दिनों से किसी के संपर्क में नहीं हैं। बुधवार सुबह इसका खुलासा हुआ कि वे नागपुर के एक निजी अस्पताल में उपचार ले रहे हैं। अब आगे क्या करना है, इसको लेकर वह संभ्रमित नजर आए। चर्चा है कि कांग्रेस वंचित आघाड़ी के उम्मीदवार नीलेश विश्वकर्मा को अपना समर्थन दे सकती है।
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व्यूहरचना में पोटे सफल
उल्लेखनीय है कि भाजपा में भी दो गुट हैं। इसमें एक तरफ पोटे और दूसरी तरफ राणा दंपति का गुट सक्रिय है। ऐसी स्थिति में पोटे 4 महीने से चुनाव में शांति के साथ व्यूहरचना में जुट गए थे। वहीं राणा की ओर से शहर अध्यक्ष डॉ। नितिन धांडे का नाम आगे किया गया था। धांडे के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में पालकमंत्री बावनकुले ने भी मंच से धांडे को आगे बढ़ने का इशारा अपने संबोधन में किया था। अंत में पक्षश्रेष्ठियों ने पोटे को टिकट दे दिया।
18 को होगा चुनाव
आगामी 18 जून को चुनाव होना है. निर्दलीय और मजबूत दावेदार माने जा रहे पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया के नामांकन में त्रुटियां बताकर सभी उम्मीदवारों ने एकजुट होकर चुनाव अधिकारी के समक्ष आक्षेप दर्ज कराया था. उसी समय यह संकेत मिल गए थे कि मतदान तक पहुंचते-पहुंचते चुनाव का समीकरण भाजपा के पक्ष में झुक सकता है.
ऐन चुनाव के बीच अस्पताल में भर्ती
कांग्रेस की निष्क्रियता पर उठे सवाल फिलहाल चुनाव मैदान में भाजपा के प्रवीण पोटे, कांग्रेस के हर्षजीत देशमुख तथा वंचित आघाड़ी के नीलेश विश्वकर्मा आमने-सामने है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन दाखिल करने के बाद से ही पार्टी के चुनाव प्रचार में अपेक्षित तालमेल और सक्रियता दिखाई नहीं दी। इस संबंध में संगठन स्तर पर न तो कोई बड़ी बैठक हुई और न ही प्रभावी रणनीति सामने आई।
चुनाव पर्यवेक्षक पूर्व पालकमंत्री यशोमति ठाकुर तथा पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख भी प्रचार अभियान में विशेष सक्रिय नजर नहीं आए। शहर व ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्षों की भूमिका भी सीमित दिखाई दी। इन परिस्थितियों ने यह संदेश दिया कि कांग्रेस इस चुनाव को लेकर गंभीर नहीं है।
कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेताओं की भाजपा प्रत्याशी के साथ आंतरिक स्तर पर सांठगांठ है, विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन क्षेत्र के 453 पार्षदों के बीच भी विभिन्न प्रकार की राजनीतिक चर्चाएं और समीकरण चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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तो होता चुनाव रोमांचक
शिंदे सेना के विधायक बच्चू कडू ने सोशल मीडिया पर खुलकर कहा कि पोटे को हर हाल में जिताने की ठान ली गई है, इससे भाजपा में नाराजगी का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इससे यह तय है कि पोटे की जीत का मार्ग प्रशस्त होता नजर आ रहा है। यहां एक बात तय है कि निर्दलीय उम्मीदवार विप्लव बाजोरिया को सुनियोजित तरीके से शासन व प्रशासन के साथ एकजुट होकर चुनाव मैदान से बाहर नहीं किया जाता, तो चुनाव काफी रोमांचक हो जाता।
