

Devendra Fadnavis Slams Yashomati Thakur: महाराष्ट्र की राजनीति में जारी घमासान के बीच एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। कांग्रेस की फायरब्रांड नेता यशोमती ठाकुर के तीखे आरोपों के पीछे की मुख्य वजह अमरावती से कांग्रेस के एमएलसी (MLC) उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख का रहस्यमय तरीके से गायब होना है। पिछले चार दिनों से अपने ही उम्मीदवार के नॉट रीचेबल होने से तिलमिलाई यशोमती ठाकुर ने महायुति सरकार पर भ्रष्टाचार और लोकतंत्र के हनन का मोर्चा खोल दिया है, जिसका मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उसी आक्रामकता से जवाब दिया है।
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब अमरावती विधान परिषद चुनाव के लिए कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख अचानक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के संपर्क से बाहर हो गए। सूत्रों के अनुसार, देशमुख पिछले चार दिनों से किसी को नहीं मिल रहे हैं, जिससे कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया है। कांग्रेस नेतृत्व का सीधा आरोप है कि यह कोई सामान्य गुमशुदगी नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने चुनाव जीतने के लिए 'हॉर्स-ट्रेडिंग' का सहारा लिया है। यशोमती ठाकुर ने आरोप लगाया कि उनके उम्मीदवार को डरा-धमकाकर या लालच देकर मैनेज कर लिया गया है ताकि विपक्षी चुनौती को खत्म किया जा सके।
यशोमती ठाकुर ने मीडिया के सामने दावा किया कि अमरावती के इस चुनाव को प्रभावित करने के लिए 20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का लेन-देन हुआ है। उनका कहना है कि विपक्षी उम्मीदवारों को चुनावी मैदान से हटाने के लिए करोड़ों के ऑफर दिए जा रहे हैं।
हालांकि, इस बीच कुछ स्थानीय सूत्रों ने दावा किया है कि हर्षजीत देशमुख नागपुर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। लेकिन कांग्रेस इसे विपक्ष की एक चाल बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बीमारी महज एक बहाना है ताकि उम्मीदवार को पार्टी के प्रभाव से दूर रखा जा सके।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र फडणवीस ने यशोमती ठाकुर को अपनी पार्टी संभालने की सलाह दी है। फडणवीस ने कहा कि जो नेता अपने ही उम्मीदवारों को संभाल नहीं सकते, वे दूसरों पर आरोप लगाकर अपनी कमजोरी छिपा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यशोमती ठाकुर को हवा में बाण नहीं चलाने चाहिए। यदि उनके पास 10 से 15 करोड़ के व्यवहार का कोई भी सबूत है, तो वे उसे पेश करें, सरकार तुरंत कड़ी कार्रवाई करेगी। फडणवीस के अनुसार, अमरावती में चुनाव प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही है और कांग्रेस के पास अपने उम्मीदवारों को एकजुट रखने की क्षमता नहीं है, इसलिए वे इस तरह की अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।