अमरावती मनपा: उपमहापौर सचिन भेंडे तस्वीर (सोर्स: नवभारत)
Amravati Municipal Corporation News: अमरावती मनपा के उपमहापौर सचिन भेंडे ने कहा कि शहर में विकास योजनाओं के लिए निधि तो आती है और योजनाएं भी बनती हैं, लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में वे प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पातीं। अच्छी योजनाओं को बल नहीं मिलता। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता इन तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यह स्थिति बदलना उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी। पदभार संभालने के बाद उन्होंने अपने आगामी कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
शहर की स्वच्छता के बारे में पूछे जाने पर भेंडे ने कहा कि “प्लास्टिक मुक्त अमरावती” समय की आवश्यकता है। शहर में कचरे के ढेरों में सबसे अधिक मात्रा प्लास्टिक कैरीबैग की दिखाई देती है। इन कैरीबैग की आपूर्ति श्रृंखला निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता को स्थायी रूप से तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से भी स्वेच्छा से प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की अपील की।
भेंडे ने कहा कि स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है, शिक्षा भी उतनी ही अहम है। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत निर्मित अष्टकोणीय स्कूल भवनों की वर्तमान दुर्दशा चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमरावती जिला नियोजन से मिलने वाला निधि आखिर खर्च कहां होता है। एआई के युग में अत्याधुनिक पुस्तकालय, विद्यार्थियों को मुफ्त पुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना जरूरी है। मनपा में सीबीएसई पैटर्न और मराठी माध्यम की पढ़ाई मुफ्त उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थी संख्या कम क्यों है, इस पर सूक्ष्म स्तर पर काम किया जाएगा। निजी स्कूलों की तुलना में शिक्षा का स्तर बेहतर बनाना प्राथमिकता रहेगी।
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उपमहापौर सचिन भेंडे ने कहा कि 15वें वित आयोग के अंतर्गत प्राप्त निधि से महानगरपालिका को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और उपकरण मिले है, लेकिन कई जगह वे उपयोग में नहीं है, करोड़ों रुपये के कथित दवा घोटाले की जानकारी भी सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन अनियमितताओं पर रोक लगाकर स्वास्थ्य सुविधाएं अंतिम पंक्ति के मरीज तक पहुंचाना उनका लक्ष्य है। वे इस दिशा में तत्काल काम शुरू कर चुके हैं और शहर के विकास के लिए ठोस एवं प्रभावी अमल सुनिश्चित करेंगे।