Amravati Crime: अमरावती सेंट्रल जेल में कैदियों के बीच खूनी झड़प, तीन विचाराधीन कैदी घायल
Amravati Jail Attack: अमरावती केंद्रीय कारागार में एक विचाराधीन कैदी ने बैरक के भीतर लाठी से तीन कैदियों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Prison Violence (सोर्सः एआय जनरेटेड फोटो-सोशल मीडिया)
Amravati Central Jail: महाराष्ट्र की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अमरावती केंद्रीय कारागार एक बार फिर सुर्खियों में है। जेल के भीतर कैदियों के बीच झड़प का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक विचाराधीन कैदी ने बैरक के भीतर लाठी से अपने ही साथ बंद तीन अन्य विचाराधीन कैदियों पर हमला कर दिया।
इस हमले में तीनों कैदी घायल हुए। यह वारदात तड़के उस समय हुई जब सभी कैदी सो रहे थे। जेल अधीक्षक के आदेश पर फ्रेजरपुरा पुलिस ने आरोपी कैदी जमील खां बिसमिल्ला खां (तलेगांव मोहना, चांदुर बाजार, अमरावती) के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
सो रहे कैदियों पर ताबड़तोड़ हमला
सूत्रों के अनुसार तड़के जब बैरक के अन्य कैदी गहरी नींद में थे, तब विचाराधीन कैदी जमील खा ने अचानक उस लकड़ी से तीन विचाराधीन कैदियों के सिर पर ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया। अचानक हुए इस जानलेवा हमले से बैरक में चीख-पुकार मच गई। सिर पर गंभीर चोटें आने के कारण तीनों कैदी गिर पड़े। जेल प्रहरियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। बैरक के भीतर लाठी कैसी आई और कहां पर छिपाकर रखी थी, इसकी जांच पुलिस करेंगी।
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जेल प्रशासन की शिकायत पर मामला
दर्ज इस गंभीर घटना के बाद अमरावती सेंट्रल जेल की अधीक्षक कीर्ति चिंतामणी डहाले के निर्देश पर जेल हवलदार गणेश बापूराव भोपले (57) ने फ्रेजरपुरा थाने में शिकायत दी। पुलिस ने जेल अधिकारियों की रिपोर्ट और डीओ के रिमार्क के आधार पर आरोपी जमील खा के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कड़े पहरे के बावजूद जेल और बैरक के भीतर इतनी बड़ी लकड़ी कैसे पहुंची? बैरक के भीतर लकड़ी से हुए इस नए हमले ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। फ्रेजरपुरा पुलिस इस पूरी लापरवाही के पीछे जेल के ही किसी स्टाफ की मिलीभगत है या सुरक्षा में कोई बड़ी चूक हुई है।
कारागृह की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न
यह कोई पहली घटना नहीं है जब अमरावती जेल की सुरक्षा तार-तार हुई हो। पिछले एक-डेढ़ साल में यहां कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने जेल प्रशासन की सतर्कता की पोल खोल कर रख दी है। हाल ही में अनुकंपा तत्व पर भर्ती हुए एक जेल सिपाही के पास से ही 7 ग्राम गांजा बरामद किया गया था, जिसकी कीमत करीब 35 हजार रुपये आंकी गई थी। नागपुर के पोक्सो मामले के एक कैदी ने जेल के – वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
मोबाइल और चरस की तस्करी
अक्टूबर 2025 में जेल के भीतर तीन कैदियों से 5 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे। वहीं अगस्त 2025 में पैरोल से लौटे एक कैदी के बैग से आधा किलो (500 ग्राम) चरस बरामद हुई थी। कुछ वर्ष पूर्व में तीन कैदी जेल की ऊंची दीवार फांदकर फरार होने में कामयाब रहे थे। यही नहीं जेल के बाहर स्थित हाईवे से टेनिस गेंद के भीतर गांजा और गुटखा भरकर जेल के अंदर फेंकने के अनोखे कारनामे भी यहां सामने आ चुके हैं।
फर्जी दस्तावेजों का खेल
इसी साल 1 मार्च को 15 कैदियों द्वारा पैरोल (अभिवचन छुट्टी) के लिए बोगस दस्तावेज जमा करने का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। इसके अलावा अकोला के अकोट निवासी और उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी के पास से पेन ड्राइव बरामद हुई थी, जिसमें जेल के शासकीय कामकाज की फाइलें और सीसीटीवी फुटेज मौजूद थे।
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अप्रैल 2026 में अकोला के एक कैदी ने ड्यूटी पर तैनात सिपाही से मारपीट की। वहीं 29 मार्च को एक न्यायबंदी कैदी ने जेल कर्मी पर बाल्टी फेंककर मारी थी। इससे पहले 8 दिसंबर 2025 को तलाशी के दौरान एक कर्मी पर स्टूल से हमला किया गया था और 7 जनवरी 2026 को सब्जी न मिलने पर एक अमलदार की कॉलर पकड़ी गई थी।
