

Highlights:
अमरावती जिले की राशन दुकानों पर इस बार त्योहार के लिए विशेष राशन किट उपलब्ध नहीं होने से लाभार्थियों में नाराजगी है।
योजना के तहत पात्र राशन कार्डधारकों को केवल 100 रुपये में चार जरूरी खाद्य वस्तुएं दी जाती थीं।
एक किलो रवा, एक किलो चना दाल, एक किलो शक्कर और एक लीटर खाद्य तेल किट में शामिल था।
Amravati Ration Scheme: दिवाली यानी आनंद, उत्साह और मिठाइयों का त्योहार। लेकिन इस बार आर्थिक रूप से कमजोर गरीब परिवारों की दिवाली पर निराशा छाई हुई है। हर साल त्योहार के अवसर पर कम कीमत में मिलने वाला 'आनंदाचा शिधा' इस बार राशन दुकानों पर उपलब्ध नहीं है।
इससे लाभार्थियों में नाराजगी है। पहले से ही सूखे के कारण आमदनी में कमी और महंगाई से बढ़े घरेलू खर्च का सामना कर रहे परिवारों को शासन की इस सहायता से राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन राशन किट नहीं मिलने से उनकी दिवाली का उत्साह फीका पड़ गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान, खेत मजदूर और रोजाना मजदूरी करने वाले परिवार इस वर्ष सूखे की स्थिति से जूझ रहे हैं। आमदनी की निश्चितता नहीं है और जरूरी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में त्योहार का अतिरिक्त खर्च भी परिवारों के बजट को बिगाड़ रहा है। दिवाली पर घर में मिठाइयां बनाना, बच्चों के लिए नई चीजें खरीदना और परिवार के साथ त्योहार मनाना हर किसी की इच्छा होती है। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों को छोटी-छोटी जरूरतों में भी कटौती करनी पड़ रही है।
दिवाली पर 'आनंदाचा शिधा' मिलने की उम्मीद में लाभार्थी राशन दुकानों की ओर देख रहे थे। खासकर गरीबों को उम्मीद थी इस बार में लाभ मिलेगा, लेकिन दुकानों में किट उपलब्ध नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं कि योजना बंद कर दी गई है या इस बार इसका क्रियान्वयन ही नहीं हुआ। लाभार्थियों ने शासन और संबंधित प्रशासन से इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही जरूरतमंद परिवारों के लिए वैकल्पिक सहायता की व्यवस्था होने पर उसकी जानकारी देने का भी आग्रह किया है।
महाराष्ट्र शासन की 'आनंदाचा शिधा' योजना के तहत पहले दिवाली और गुड़ी पाड़वा जैसे त्योहारों पर पात्र राशन कार्डधारकों को केवल 100 रुपए में चार जरूरी वस्तुओं की किट दी जाती थी। इसमें एक किलो रवा, एक किलो चना दाल, एक किलो शक्कर और एक लीटर पाम तेल अथवा खाद्य तेल शामिल था।
अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता परिवार समूह के पात्र लाभार्थियों के साथ शासन द्वारा पात्र घोषित कुछ क्षेत्रों के किसान राशन कार्डधारकों को भी उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से इसका लाभ मिलता था। कम कीमत में मिलने वाली इस किट से त्योहार के खर्च का कुछ बोझ कम होता था।