नकली सोयाबीन बीज मामला: अमरावती और अकोला में 19 बीज कंपनियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई

Akola Seed Companies: अमरावती और अकोला में किसानों को निकृष्ट और बोगस सोयाबीन बीज बेचने के आरोप में 19 बीज कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। कृषि विभाग की जांच में कई बीज नमूने अमानक पाए गए।
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बोगस सोयाबीन बीज- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Amravati Fake Soybean Seed Case: अमरावती जिले में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को बोगस और निकृष्ट दर्जे के सोयाबीन बीज बेचकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले बीज उत्पादक कंपनियों के खिलाफ कृषि विभाग और पुलिस ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की है। जिले के विभिन्न ग्रामीण थानों में 9 बीज कंपनियों के खिलाफ कुल 26 मामले दर्ज किए गए हैं।

हाल ही में जिला नियोजन समिति (डीपीसी) की बैठक में जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बोगस बीज कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश कृषि विभाग को दिए थे। इसके बाद कृषि अधिकारियों और बीज निरीक्षकों की शिकायतों के आधार पर बीज अधिनियम के तहत विभिन्न कंपनियों और उनके संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

चांदूर बाजार और अंजनगांव सुर्जी में FIR

चांदूर बाजार थाने में बीज निरीक्षक अश्विनी चव्हाण और प्रवीण पवार की शिकायत पर गुरुग्राम (हरियाणा) की एक कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यहां अकेले 113 से अधिक किसानों ने बीज नहीं उगने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अंजनगांव सुर्जी थाने में बीज निरीक्षक शोहैल शेख और सुरेश रामभाऊ की शिकायत पर छत्रपति संभाजीनगर तथा मध्य प्रदेश की कंपनियों के खिलाफ बोगस और निकृष्ट दर्जे के सोयाबीन बीज बेचने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई।

खेतों के पंचनामे में खुली कंपनियों की पोल

कृषि विभाग के अधिकारियों और तालुका स्तरीय शिकायत निवारण समितियों ने प्रभावित किसानों के खेतों का प्रत्यक्ष मुआयना (पंचनामा) किया, जांच के दौरान पाया गया कि बुआई के कई दिन बाद भी खेतों में सोयाबीन का एक भी अंकुर नहीं फूटा था। कई किसानों ने संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला और टालमटोल की गई। इन बोगस बीजों के कारण किसानों की बुआई, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर हुआ पूरा खर्च व्यर्थ चला गया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

नांदगांव खंडेश्वर सहित अन्य क्षेत्रों में भी जांच

नांदगांव खंडेश्वर थाने में कृषि अधिकारी गजानन गिहें और संजय नारायणराव पाटिल की अगुवाई में जांच के बाद मध्य प्रदेश की विभिन्न बोगस बीज निर्माता कंपनियों के खिलाफ कुल 5 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। मोर्शी (शिरखेड) और सरमसपुरा थाने में कृषि अधिकारी राहुल चौधरी तथा देवरावजी उईके की शिकायत पर मध्य प्रदेश की दो बीज कंपनियों के खिलाफ किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया। कुर्ता और माहुली जहांगीर थाने में क्रमशः कृषि निरीक्षक राजेंद्र बांबल और शुद्धोधन वरघट की शिकायत पर मध्य प्रदेश की दो कंपनियों के खिलाफ भी पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

बीजों की अंकुरण क्षमता की जांच में पाई गई कमी

अकोला, ब्यूरो, किसानों की खराब गुणवत्ता वाले सोयाबीन बीज उपलब्ध कराने और उनकी फसल को नुकसान पहुंचाने के आरोप में जिले में बीज कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। कृषि विभाग की शिकायतों के आधार पर जिले के विभिन्न पुलिस थानों में 10 बीज कंपनियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। बालापुर पुलिस थाने में तहसील कृषि अधिकारी कार्यालय के कृषि अधिकारी (गुणवत्ता नियंत्रण) सुधाकर मोरे ने शिकायत दर्ज कराई है।

अंकुरण क्षमता में भारी कमी

शिकायत के अनुसार मध्य प्रदेश की अपोलो प्रीमियर, विजयनगर स्क्वेयर इंदौर स्थित ईगल सीड्स एंड बायोटेक प्रा। लि। सहित अन्य कंपनियों के सोयाबीन बीज की अंकुरण क्षमता को लेकर किसानों से शिकायते प्राप्त हुई थीं। कृषि विभाग ने सबंधित बीजों के नमूने लेकर जांच के लिए महाबीज की प्रयोगशाला में भेजे थे। जांच रिपोर्ट में एक बीज नमूना अंकुरण क्षमता परीक्षण में केवल 21 प्रतिशत पाया गया, जिसे अमानक घोषित किया गया। इसके बाद संबंधित कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

कई कंपनियां कानूनी घेरे में

जिले के अलग-अलग पुलिस थानों में ओसवाल सीड्स, विगर सीड्स, ईगल सीड्स, एश्योर सीड्स, इनोवेज (पाश्वं जेनेटिक) सीड्स, ग्रीन गोल्ड सीड्स, दफ्तरी सीड्स, अंकुर सीड्स और बाफना सीड्स सहित अन्य कंपनियों के खिलाफ अमानक बीज विक्री के मामले दर्ज किए गए हैं। कृषि विभाग की कार्रवाई से उन बीज कंपनियों में हड़कंप मच गया है, जो किसानों को खराब गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराकर नुकसान पहुंचा रही थीं। विभाग द्वारा आगे भी बीजों की गुणवत्ता की जांच और दोषी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

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