देवस्थान इनाम निर्मूलन ड्राफ्ट एक्ट के विरोध में अमरावती के मंदिर ट्रस्टियों का हल्लाबोल
Maharashtra Temple : अमरावती में सैकड़ों मंदिर ट्रस्टियों, पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन ड्राफ्ट एक्ट 2026 का विरोध करते हुए आयुक्त और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
Temple Property (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Amravati Temple Trustees: अमरावती जिले के सैकड़ों मंदिरों के ट्रस्टियों, पदाधिकारियों और भक्तों ने मंदिर की रक्षा के लिए एकजुट होकर कमिश्नर और जिला कलेक्टर को भेंट कर अपनी मांगों का निवेदन सौंपा। ट्रस्टियों द्वारा दिए गए ज्ञापन की जानकारी देते हुए नीलेश तवलारे ने कहा कि मंदिरों को दान में मिली या खरीदी गई खेती की जमीनों का मूल्यांकन कंपनियों या संस्थाओं के हिसाब से नहीं, बल्कि खेती के रेट पर किया जाना चाहिए।
साथ ही, मंदिरों के दान और खरीद के कागज़ात पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह से माफ कर दी जानी चाहिए। प्राकृतिक आपदा में मंदिरों को भी मुआवजा दें। अगर मंदिर के खेत को कुदरती आफतों, बेमौसम बारिश, ओले, सूखे या दूसरी वजहों से नुकसान होता है, तो आम किसानों की तरह मुआवज़ा और सरकारी मदद दी जानी चाहिए।
ट्रस्टियों ने कलेक्टर-आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
सीलिंग एक्ट के तहत मंदिर की खेती की जमीन को दी गई छूट को बनाए रखा जाना चाहिए और इसके लिए ज़रूरी अलग-अलग तरह के छूट सर्टिफिकेट की शर्तों को रद्द किया जाना चाहिए। इस बयान में एक और मुद्दे पर आशीष मरुडकर ने कहा कि मंदिर और तीर्थ विकास के फंड को खर्च करते समय संबंधित मंदिर संस्थाओं, ट्रस्टी बोर्ड और लोकल मैनेजमेंट कमेटियों को ध्यान में रखकर भरोसे में लेकर फैसले लिए जाने चाहिए।
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प्रशासन और सरकार को दिए गए बयान में कहा गया कि मंदिर और तीर्थ विकास के लिए पहचानी गई जमीन को संबंधित विकास एजेंसी को ट्रांसफर करने की शर्त को रद्द किया जाना चाहिए। देवस्थान इनाम निर्मूलन ड्राफ्ट एक्ट का विरोध। इस मौके पर कैलाश पनपालिया ने कहा कि अमरावती जिले के अलग-अलग मंदिरों, मंदिर संस्थाओं, ट्रस्टी बोर्ड और धार्मिक संगठनों ने राज्य सरकार के रेवेन्यू और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट द्वारा प्रस्तावित महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन ड्राफ्ट एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट पर कड़ा एतराज जताया।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी
रेवेन्यू और फारेस्ट डिपार्टमेंट के तैयार किए गए ड्राफ़्ट से मंदिर की इनाम की ज़मीन पर मंदिरों का मालिकाना हक खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। यह मांग की गई कि इन ज़मीनों को बचाने के लिए ड्राफ़्ट एक्ट को तुरंत वापस लिया जाए और रद्द किया जाए, जो मंदिरों के फ़ाइनेंशियल सिस्टम, धार्मिक कामों, पूजापाठ, त्योहारों और सामाजिक कामों का मुख्य आधार हैं।
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सरकार को मंदिर के ट्रस्टियों, धार्मिक संस्थाओं और समाज के प्रतिनिधियों से पूरी बातचीत के बाद ही कोई फ़ैसला लेना चाहिए, नहीं तो मौजूद लोगों ने पूरे राज्य में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी। इस मौके पर अमरावती ज़िले के अलग-अलग मंदिरों के बड़ी संख्या में ट्रस्टी, पदाधिकारी, धर्मप्रेमी नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।
पद्मश्री जनार्दन पंत बोथे, दीपक सब्जीवाले, मीना पाठक, राजेंद्र टेम्बे, संजय मेने, सुनील कलमेग, रवींद्र भोयर, विजय करडे, अनिल मेपल, साहेबराव, श्रीकृष्ण मावले, अतुल ठाकरे, विनोदराव वानखड़े, शुभम, सुरेश, शंकर येवले, कृष्ण मारोडकर, गजानन मुदगल, अनिल वानखड़े, मोहन इंगले, धीरज इंगले, सोपान करडे, कैलास गिरोलकर, प्रशांत इंगोले साथ ही सुनील कालमेघ, विकास वैद्य, अविनाश देशमुख अन्य मौजूद थे।
