अंबाझरी तालाब में ओवरफ्लो
नागपुर: अंबाझरी तालाब ओवरफ्लो होने के कारण सिटी में आई बाढ़ से मची त्राहि को देखते हुए कुछ दिनों तक तो अफसरों ने गंभीरता दिखाई गई। लेकिन अब हमेशा की तरह स्थिति को सामान्य तरह की मानने लगे हैं। इसका जीता जागता प्रमाण यह है कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त हाई पावर कमेटी ने अंबाझरी तालाब को मजबूत बनाने की दिशा में तो काम किया लेकिन इसके ओवरफ्लो होने के बाद सिटी में आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए किसी तरह का विकल्प तैयार नहीं किया है।
आश्चर्य की बात तो यह है कि 2 वर्ष पूर्व आई बाढ़ के कारण अंबाझरी के किनारों की बस्तियों से लेकर झांसी रानी चौक और आसपास का पूरा क्षेत्र जलमग्न हो चुका था। लंबे समय तक यहां से पानी की निकासी नहीं हो पाई थी। अभी भी स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल है। लेकिन इस ओर अफसरों का ध्यान ही नहीं है।
तो क्या बाढ़ के बाद अलर्ट होगा प्रशासन?
नाशिक के महाराष्ट्र इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार की गई योजना के भरोसे बाढ़ का अलर्ट मिलने का दावा किया जा रहा है। दावा कितना भी पुख्ता क्यों न हो लेकिन यह निश्चित है कि अंबाझरी परिसर के बाढ़ से डूबने का खतरा दूर नहीं हुआ है। यदि भारी बारिश हुई तो निश्चित ही अंबाझरी तालाब ओवरफ्लो होने के कारण सिटी के डूबने की आशंका बनी रहेगी। ओवरफ्लो से निकलने वाले पानी में किसी तरह की बाधा न रहे तथा इसके सुचारु निकासी की व्यवस्था हो तो ही बाढ़ की स्थिति से निपटा जा सकता है। लेकिन इस दिशा में कोई ठोस प्रयास होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं। भले ही अलर्ट मिल जाए लेकिन सिटी में पानी घुसने के बाद उसकी निकासी की यदि व्यवस्था न हो तो इस त्रासदी से निपटने के लिए प्रशासन को लोहे के चने चबाने पड़ जाएंगे।
अब तक अलर्ट नहीं हुआ आपदा प्रबंधन
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अब समय नहीं बचा है
जानकारों के अनुसार पुराने अनुभव से सबक लेकर भविष्य के लिए तैयार रहने अब प्रशासन के पास समय भी बचा नहीं है। लगभग पूरा वर्ष निकल गया लेकिन किसी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। केवल हर वर्ष होने वाले नदी सफाई अभियान को शुरू कर दिया गया। जहां नदी का बड़ा दायरा है वहां सफाई को लेकर मनपा सक्रिय दिखाई दी। लेकिन जहां संकरी जगह है और बहाव में रुकावट का कारण बन रहा है, ऐसी जगहों पर कोई सक्रियता नहीं है। अब मानसून सिर पर होने के कारण बारिश का पानी बहाकर ले जाने वाले स्टाम वाटर ड्रेनेज की सफाई पर भी ध्यान देना होगा। नहीं तो सिटी में नाव चलाने की नौबत आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।