

Amravati Free Education System: सरकार की निशुल्क शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने तथा सशुल्क शिक्षा को बढ़ावा देने की कथित नीतियों और ऑनलाइन स्टाफ स्वीकृति संचमान्यता में मौजूद विसंगतियों के विरोध में अमरावती स्थित विभागीय उपशिक्षा निदेशक कार्यालय के समक्ष विज्युक्टा के नेतृत्व में विशाल धरना आंदोलन किया गया। प्रशासन जगाओ नाम से आयोजित इस आंदोलन का नेतृत्व विज्युक्टा के अध्यक्ष अविनाश बोर्डे ने किया।
इसमें अकोला सहित अमरावती संभाग के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से राज्य की निशुल्क शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 15 मार्च 2024 के शासनादेश के कारण अनेक अनुदानित एवं निशुल्क शिक्षा देने वाली शालाओं के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
इसके साथ ही ऑनलाइन संचमान्यता प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे नियम लागू किए जा रहे हैं, जो शिक्षकों और विद्यालयों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहे हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि संचमान्यता में कुछ अस्थायी सुधार किए जाने के बावजूद कई गंभीर त्रुटियां अब भी बरकरार हैं। गलत संचमान्यता के कारण हजारों शिक्षकों के अतिरिक्त घोषित होने की आशंका है। आंदोलन में अरविंद मंगले, रमेश खाडे, रविंद्र कावरे, विनय काले, अनिल काले, संतोष वाघ, संतोष अहिर, पंकज वाकोडे, श्रीराम पालकर, अविनाश काले, इक्बाल खान उपस्थित रहे।
शिक्षकों ने बताया कि ऑनलाइन प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को आयु संबंधी शर्तों के कारण अपात्र ठहराया जा रहा है। संयुक्त कक्षाओं की छात्र संख्या में त्रुटियां, प्रचलित छात्र संख्या मानकों की अनदेखी, प्रायोगिक विषयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना तथा विषयों की गलत जोड़ियां बनाना जैसी कई समस्याएं अब भी कायम हैं। आंदोलनकारियों ने इन त्रुटियों को तत्काल दूर करने की मांग की है।