Akola News: सोयाबीन पर ‘पीला मोजैक’ का कहर! मुर्तिजापुर के किसान कंगाली के कगार पर
Akola District की मुर्तिजापुर तहसील में सोयाबीन की फसल पर पीला मोजैक बीमारी का असर देखने के लिए मिल रहा है। जिसके चलते किसानों में चिंता का विषय काफी गंभीर हो गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
सोयाबीन (सौ. सोशल मीडिया )
Murtijapur News: तहसील के कई इलाकों में सोयाबीन की फसल पर ‘पीला मोजैक’ नामक बीमारी का प्रकोप देखा जा रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। पहले से ही लगातार बारिश और कीट-रोगों से परेशान किसान अब इस नई समस्या से बेहाल हैं।
सोयाबीन की फसल में फलियां लगने के समय यह रोग तेजी से फैल रहा है, जिससे किसान काफी चिंतित हैं। यह रोग मुख्य रूप से सफेद मक्खी नामक कीट के कारण फैलता है, जिससे पत्तों पर पीले धब्बे पड़ने लगते हैं, पत्ते पीले हो जाते हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। इस रोग से फसल की पैदावार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
हो रहा दोहरा नुकसान
इस रोग से बचाव के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, और अगर पैदावार कम हुई तो उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ेगा। कई किसान सरकार से तुरंत सलाह, मार्गदर्शन और आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण सोयाबीन और कपास जैसी फसलों पर कई तरह के रोग आ रहे हैं। सोयाबीन की फसल पकने से ठीक पहले अचानक पीली पड़ रही है, पत्ते सूख रहे हैं और पौधे भी मुरझा रहे हैं। इससे फलियों का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाएगा। किसान इस बात से भी चिंतित हैं कि शायद उन्हें बीज का खर्च भी न मिल पाए।
सम्बंधित ख़बरें
क्या पीएम मोदी को पैदल चलना चाहिए? PM काफिले को लेकर हमलावर हुए विपक्ष पर संजय निरुपम का पलटवार
महाराष्ट्र कन्यादान योजना: बेटियों की शादी के लिए सरकार दे रही ₹25,000 की मदद, जानिए आवेदन प्रक्रिया
वीकेंड पर घूमने का बना रहे प्लान? महाराष्ट्र के इन ट्रैकिंग स्पॉट का लें मजा, लास्ट स्पॉट जन्नत से कम नहीं
PM मोदी की अपील का असर: महाराष्ट्र के 12 विधायकों का विदेश दौरा रद्द, विधानसभा अध्यक्ष का बड़ा फैसला
ये भी पढ़ें :- Akola में ओबीसी समाज का अनिश्चितकालीन अनशन शुरू, सरकार ने हैदराबाद गैजेटियर से किया अन्याय
सरकार से तत्काल मदद की अपील
इस मुश्किल हालात में, किसानों की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो रही है। किसानों का कहना है कि सरकार को तुरंत उनकी मदद करनी चाहिए ताकि जगत के अन्नदाता को इस मुश्किल से बचाया जा सके।
