अकोला का न्यू तापड़िया नगर फ्लाईओवर क्यों अटका? हाईकोर्ट पहुंचे मामला, जानिए धीमी रफ्तार का असली सच

Akola Railway Overbridge: न्यू तापड़िया नगर रेलवे फ्लाईओवर मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य निर्माण विभाग ने देरी के लिए रेल प्रशासन की धीमी रफ्तार और डिजाइन में बदलाव को जिम्मेदार ठहराया है।
Akola Tapadia Nagar Flyover
न्यू तापडिया नगर स्थित रेलवे उड़ानपुलप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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Akola Tapadia Nagar Flyover: अकोला शहर के न्यू तापडिया नगर स्थित रेलवे उड़ानपुल मामले में मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई है। इस सुनवाई में राज्य सरकार के निर्माण कार्य विभाग ने दाखिल किए गए उत्तर में स्पष्ट किया है कि प्रकल्प के लंबित रहने का मुख्य कारण रेल प्रशासन की धीमी गति है।

पिछले आठ वर्षों से यह पुल प्रकरण लंबित है। रेलवे गेट पर लगातार बढ़ती ट्रैफिक जाम, वैकल्पिक मागों पर दबाव और समय की बर्बादी के कारण नागरिकों में तीव्र नाराजगी है। इस मुद्दे पर अकोला के रहिवासी और सामाजिक कार्यकर्ता एड। नरेंद्र बेलसरे ने जनहित याचिका दाखिल की थी।

पुल के डिज़ाइन में बदलाव

रेल प्रशासन की धीमी गति निर्माण कार्य विभाग न्यायालय को बताया कि पुल का रेलवे उड़ानपुल पुल का रेल क्षेत्र में आने वाला हिस्सा रेल प्रशासन द्वारा बनाया जाना है। खर्च का विवरण मांगने पर भी रेल ने आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, काम की धीमी गति और पुल के डिज़ाइन में बदलाव ही विलंब के मुख्य कारण बताए गए हैं।

अंडरपास का विवाद मूल मंजूर प्रस्ताव में केवल उड़ानपुल का समावेश था। बाद में रेल अंडरपास को भी शामिल किया गया, लेकिन उसके लिए स्वतंत्र अनुमान प्रस्तुत नहीं किया गया। निर्माण कार्य विभाग ने न्यायालय में स्पष्ट किया कि इसके लिए सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी आवश्यक है। खर्च में भारी वृद्धि प्रकल्प के खर्च में भी बड़ी वृद्धि हुई है।

शुरुआत में 36 करोड़ का अनुमान था, बाद में यह 48 करोड़ हुआ और फिर ओव्हरब्रिज व अंडरब्रिज मिलाकर लगभग 79।26 करोड़ का अनुमान प्रस्तुत किया गया, निर्माण कार्य विभाग ने इस वृद्धि के कारणों और तुलनात्मक खर्च विवरण की मांग रेल से की है।

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निधि उपलब्ध होने पर भी काम अभी भी अधूरा

अकोला शहर के न्यू तापडिया नगर स्थित रेलवे निर्माण कार्य विभाग के अनुसार 27 अगस्त 2024 को रेल प्रशासन को लगभग 24 करोड़ रुपये निधि जमा कराए गए थे, लेकिन रेल ने केवल 15 प्रतिशत काम ही पूरा किया।

विभाग ने रेल से काम की गति बढ़ाने और मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग की थी। नवंबर 2024 में भी काम की धीमी गति का उल्लेख किया गया। पुल का अंतिम डिजाइन उच्चस्तरीय रेल प्राधिकरण से मंजूर नहीं हुआ था।

आठ वर्षों से अटके पुल का काम पूरा करना चाहिए

अकोला शहर के न्यू तापडिया नगर रेलवे गेट का उड़ानपुल अब केवल शासकीय निर्माण कार्य का विषय नहीं रहा, बल्कि यह शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। याचिकाकर्ता एड. नरेंद्र बेलसरे ने कहा कि सरकार के दो विभागों ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर ढकलने के बजाय समन्वय साधकर आठ वर्षों से अटके पुल का काम पूरा करना चाहिए। नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ अब बंद होना चाहिए।

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