गणवेश योजना के नए प्रावधानों पर शिक्षक संघ नाराज, पुराने नियम बहाल करने की मांग
Free School Uniform Schem: महाराष्ट्र में निःशुल्क स्कूल गणवेश योजना के नए नियमों को लेकर शिक्षकों और स्कूल प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। नए प्रावधान अगले वर्ष से लागू किए जाएं यह मांग की गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
School Uniform (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Maharashtra Education Department: चालू शैक्षणिक सत्र से राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क स्कूल गणवेश योजना की प्रक्रिया में कई नए बदलाव किए गए हैं। हालांकि इन नए नियमों के क्रियान्वयन में उचित नियोजन का अभाव दिखाई दे रहा है। नई शर्तों और जटिल प्रक्रियाओं के कारण स्कूल प्रशासन, मुख्याध्यापकों, शिक्षकों तथा स्थानीय महिला बचत समूहों के सामने कई व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अखिल महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए पुराने नियमों के अनुसार ही गणवेश योजना लागू की जाए तथा नए प्रावधानों की शुरुआत अगले शैक्षणिक वर्ष से की जाए। संघ का कहना है कि सरकार द्वारा यह निर्णय मई माह के अंतिम सप्ताह में घोषित किया गया, जिसके कारण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बहुत कम समय उपलब्ध हो पाया।
नए प्रावधान अगले वर्ष से लागू करने की मांग
महिला बचत समूहों के लिए इतनी कम अवधि में गणवेश हेतु कपड़े की खरीद, प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत नाप लेना तथा निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप गणवेश तैयार कर स्कूल शुरू होने तक विद्यार्थियों को उपलब्ध कराना लगभग असंभव है। ऐसे में गणवेश वितरण योजना में देरी होने की आशंका बढ़ गई है और विद्यार्थियों को समय पर गणवेश मिल पाएगा या नहीं, इसको लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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कपड़े की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था नहीं
नए नियमों के अनुसार गणवेश निर्माण के लिए कॉटन मिक्स कपड़े का उपयोग अनिवार्य किया गया है। लेकिन बाजार में उपलब्ध कपड़े की गुणवत्ता की जांच करने के लिए स्कूलों के पास कोई तकनीकी व्यवस्था या प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यदि निम्न गुणवत्ता का कपड़ा उपयोग में आता है तो इसकी जिम्मेदारी मुख्याध्यापकों पर आने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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शिक्षक संघ ने मांग की है कि सरकार स्वयं अधिकृत कपड़ा आपूर्तिकर्ताओं की नियुक्ति करे अथवा किसी निर्धारित ब्रांड को मान्यता देकर गुणवत्तापूर्ण कपड़े की उपलब्धता सुनिश्चित करे, जिससे विद्यार्थियों को समय पर बेहतर गुणवत्ता के गणवेश मिल सकें और स्कूलों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
