Lakhni Nagar Panchayat News: एक ओर जहां मृत्यु का शोक परिवार को तोड़ देता है, वहीं लाखनी नगर पंचायत की लापरवाही ने इस दुख को आक्रोश में बदल दिया है। लाखनी शहर में अंतिम यात्रा के लिए शुरू की गई स्वर्ग रथ सेवा चालक की मनमानी और प्रशासन की उदासीनता के कारण सफेद हाथी साबित हो रही है। आलम यह है कि श्मशान भूमि तक मृतदेह ले जाने के लिए परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है या निजी संसाधनों के लिए दरदर भटकना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों की सुविधा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए विधायक नाना पटोले ने विशेष पहल करते हुए यह स्वर्ग रथ उपलब्ध कराया था। लेकिन नगर पंचायत प्रशासन इस सुविधा को सुचारू रूप से चलाने में पूरी तरह विफल रहा है। नियुक्त किया गया चालक अक्सर ऐन मौके पर गायब हो जाता है, जिससे शोकाकुल परिवारों को भारी मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी के इस दौर में जब शहर से श्मशान भूमि की दूरी अधिक हो, तब इस सेवा का ठप होना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। नगरसेवक ने संभाला मोर्चा, लगाई फटकार। बीते 8 अप्रैल को जब मृतक अल्केश उमराव डहाके की अंत्ययात्रा के समय फिर वही स्थिति पैदा हुई, तो जनआक्रोश फूट पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरसेवक राजेश निम्बेकर ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने न केवल नगर पंचायत प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि अपने स्तर पर निजी वाहन चालक की व्यवस्था कर स्वर्ग रथ को श्मशान भूमि तक रवाना करवाया। हालांकि, नागरिकों का सवाल है कि क्या हर बार अंतिम संस्कार के लिए जनप्रतिनिधियों को ही सड़क पर उतरना पड़ेगा।
चौतरफा बदहाली में लाखनी नगर पंचायत। स्वर्ग रथ सेवा तो केवल एक उदाहरण है, नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर अब चौतरफा सवाल उठ रहे हैं। शहर के कई वार्डों में कचरा संग्रहण की गाड़ियां हफ्तों तक नहीं पहुंच रही हैं।
नालियों की सफाई न होने से सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।