खामगांव में गौ संरक्षण को लेकर बड़ा आंदोलन, 21,600 हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौंपा
Khamgaon News: खामगांव में हजारों गौभक्तों ने गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग की। 21,600 हस्ताक्षर के साथ ज्ञापन सौंपा गया। आंदोलन में गौ रक्षकों और हिंदुत्व कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
Akola Cow Protection Movement News: खामगांव में गौ संरक्षण और सम्मान को लेकर एक व्यापक जनआंदोलन देखने को मिला, जिसमें हजारों गौभक्तों ने गाय को “राष्ट्र माता” का संवैधानिक दर्जा देने की मांग उठाई। इस अभियान के तहत 21,600 नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। शहर में आयोजित इस “गो सम्मान आह्वान अभियान” के दौरान सैकड़ों गौसेवक, गौ रक्षक और हिंदुत्व से जुड़े कार्यकर्ता एकत्रित हुए।
लगभग 500 से 700 लोगों की सहभागिता वाले इस मोर्चे ने एसडीओ कार्यालय तक रैली निकालकर अपनी मांगें रखीं। विशेष बात यह रही कि इस रैली में वास्तविक गायों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को प्रतीकात्मक रूप से और प्रभावशाली बना दिया। “गौ वध बंद करो, गौओं को बचाओ, देश को बचाओ” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
- अभियान के समन्वयकों ने तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं
- गाय को भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार मानते हुए “राष्ट्र माता” या “राष्ट्र आराध्य” का दर्जा दिया जाए
- पूरे देश में एक समान और सख्त केंद्रीय गौ संरक्षण कानून लागू किया जाए
- गौवंश संरक्षण के लिए अलग से “केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय” की स्थापना हो
- मवेशियों की तस्करी और गौ वध को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए
- दोषियों को कठोर दंड, यहां तक कि आजीवन कारावास का प्रावधान हो
- राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50–100 किमी पर गोवाहिनी एम्बुलेंस और पशु आघात केंद्र स्थापित किए जाएं
संवैधानिक आधार
ज्ञापन में इन मांगों को भारत के संविधान के अनुच्छेद 48, 51A(g), 25 और 21 से जोड़ते हुए तर्क प्रस्तुत किए गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि गाय संरक्षण न केवल सांस्कृतिक बल्कि नैतिक और आर्थिक दृष्टि से भी आवश्यक है।
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आगे की रणनीति
आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और नैतिक तरीकों से चलाने की बात कही गई है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे जुलाई 2026 तक सरकार के निर्णय का इंतजार करेंगे। यदि 27 जुलाई तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो पुनः जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर नई दिल्ली में बड़े स्तर पर संकीर्तन और प्रार्थना सभा आयोजित करने की योजना बनाई गई है। यह अभियान क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन जुटाने में सफल रहा है और आने वाले समय में इसके और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
