Akola में झोपड़पट्टीवासियों का हल्लाबोल, स्थायी घर और मालिकाना हक की मांग पर उग्र प्रदर्शन

Akola में झोपड़पट्टीवासियों का मुद्दा गर्माया हुआ है। ये सिर्फ इन झोपड़पट्टी में रहने वालों के घर का मामला नहीं है, बल्कि ये उनके जीवन, सम्मान और भविष्य से जुड़ा है।
Akola में झोपड़पट्टीवासियों का मुद्दा गर्माया हुआ है। ये सिर्फ इन झोपड़पट्टी में रहने वालों के घर का मामला नहीं है, बल्कि ये उनके जीवन, सम्मान और भविष्य से जुड़ा है। इसे लेकर कई प्रकार के वादे किए गए जिन्हें जमीनी हकीकत में साकार नहीं किया गया।
झोपड़पट्टिवासी विरोध प्रदर्शन (सौ. नवभारत )
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Akola News In Hindi: शहर के झोपड़पट्टीवासियों का मुद्दा केवल निवास का नहीं, बल्कि उनके जीवन, सम्मान और भविष्य से जुड़ा हुआ है। इस गंभीर विषय पर सरकार ने समय-समय पर योजनाएं बनाई और निर्णय लिए, लेकिन इनका लाभ वास्तविक रूप से झोपड़पट्टीधारकों तक नहीं पहुंच पाया।

इसी असमानता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मंगलवार को अकोला विकास संघर्ष मंच के नेतृत्व में सैकड़ों झोपड़पट्टीवासी जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष मोर्चा लेकर पहुंचे। गांधी जवाहर बाग से शुरू हुआ यह मोर्चा पंचायत समिति मार्ग से होते हुए घोषणाओं के साथ जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा।

मोर्चे का नेतृत्व दत्ता भिसे, नीलू सराटे, सुरेश लुले, समाजसेवक गजानन हरणे, साधना खिल्लारे, डा। राजकुमार रंगारी, पंचफुला मोरे, संजय राऊत, वंदना कांबले, पूजा खंडारे, पंकज काले, संध्या जोशी, पिरु शेख, मलंग गवली, राजू तायडे, प्रकाश शिरसाट और शंकर इंगोले सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि झोपड़पट्टीवासियों को केवल अस्थायी छत नहीं, बल्कि स्थायी मालिकाना हक मिलना चाहिए। निवास हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है और योजनाओं की केवल कागजी अमल पर नहीं, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए।

इसी मांग को बुलंद करने के लिए यह मोर्चा निकाला गया। इस अवसर पर मनपा आयुक्त और जिलाधिकारी को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया और जल्द कार्रवाई की मांग की गई। अकोला विकास संघर्ष मंच ने सूचना दी है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं

  • सरकार की झोपड़पट्टी भाडेपट्टा नीति के अनुसार पात्र परिवारों को उपयोग की जा रही जमीन के मालिकाना हक दिए जाएं।
  • 2011 से पहले की अतिक्रमणों को नियमित किया जाए।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, रमाई और शबरी योजना के तहत घरकुल के लिए अनुदान दिया जाए।
  • शहर की सभी झोपड़पट्टियों का सर्वेक्षण कर पट्टों का वितरण किया जाए।
  • यह मोर्चा झोपड़पट्टीवासियों की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास रहा, जिसमें उनके अधिकारों की पुनः मांग की गई।
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